एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला के संजौली में बन रही ट्विन ट्यूब (चलौंठी-संजौली-भट्टाकुफर) सुरंग के निर्माण को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को कड़े निर्देश जारी किए हैं। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने एनएचएआई से स्पष्टीकरण मांगा है कि शिमला बाईपास परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण कर 600 करोड़ रुपये का भारी-भरकम मुआवजा बांटने के बाद, अचानक घनी आबादी वाली पहाड़ी के नीचे सुरंग बनाने का फैसला क्यों लिया गया।
600 करोड़ के नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
हाईकोर्ट ने एनएचएआई को अपने जवाब में यह स्पष्ट करने को कहा है कि मूल योजना को क्यों छोड़ा गया।
क्या थी मूल योजना: छकड़ेल, भट्टाकुफर और ढली से होकर एक सरफेस हाईवे (सतही मार्ग) बनाया जाना था।
कितना हुआ विस्थापन: इसके लिए लगभग 88 परिवारों को विस्थापित कर उनके घरों को तोड़ा गया और 600 करोड़ रुपये का मुआवजा बांटा गया। अदालत ने सख्त लहजे में पूछा है कि इस योजना को बिना किसी ठोस वजह के छोड़ने से सरकारी खजाने को जो 600 करोड़ का नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई आखिर कौन करेगा।
घनी आबादी के नीचे सुरंग, घरों में आईं दरारें
यह सुनवाई संजौली के प्रभावित स्थानीय निवासियों (विनीत शर्मा व अन्य) द्वारा दायर याचिका पर की गई। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सुरंग के असुरक्षित निर्माण कार्य की वजह से उनके घरों में दरारें आ गई हैं और कई मकानों को असुरक्षित घोषित कर दिया गया है।
वैज्ञानिक चेतावनी की अनदेखी: याचिका में दिए गए दस्तावेजों के अनुसार, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने पहले ही इस घनी आबादी वाली पहाड़ी के नीचे सुरंग न बनाने की सलाह दी थी।
सतह से मात्र 14 मीटर की दूरी: रिपोर्ट के अनुसार, सिमेट्री (कब्रिस्तान) और विशाल मेगा मार्ट जैसे कुछ स्थानों पर सुरंग और ऊपर बनी सतह (जहां सैकड़ों मकान हैं) के बीच की दूरी महज 14 मीटर है। इसके अलावा, सुरंग के दोनों तरफ से भारी मात्रा में पानी का रिसाव भी हो रहा है।
17 नवंबर को होगी मामले की अगली सुनवाई
अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार, प्रदेश सरकार और एनएचएआई समेत अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 को तय की गई है।
सुरक्षा रिपोर्ट आने तक काम रहेगा बंद: सुनवाई के दौरान एनएचएआई ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि स्थानीय लोगों की चिंताओं और तकनीकी टीम के इनपुट के बाद 18 सितंबर से सुरंग का काम पूरी तरह बंद है। जब तक आईआईटी रुड़की (IIT Roorkee) की तकनीकी टीम अपनी सुरक्षा रिपोर्ट नहीं सौंप देती और मकानों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हो जाते, तब तक निर्माण शुरू नहीं किया जाएगा। अदालत ने भी उम्मीद जताई है कि अगली सुनवाई तक कोई निर्माण गतिविधि नहीं होगी।
