एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में रिश्तों को शर्मसार करने वाले एक बेहद संवेदनशील मामले में अदालत ने ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। शिमला के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) ने अपनी ही सात साल की मासूम भांजी के साथ दुष्कर्म करने वाले मामा को दोषी करार देते हुए 25 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाने के साथ ही पीड़िता को चार लाख रुपये का अतिरिक्त मुआवजा देने के भी आदेश जारी किए हैं।
क्या है पूरा मामला?
अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में पेश किए गए विवरण के अनुसार, यह घटना दिसंबर 2024 की है। पीड़िता अपनी मां के साथ शिमला में एक किराये के कमरे में रहती थी और हर रविवार को अपने ननिहाल जाया करती थी। 1 दिसंबर 2024 को भी बच्ची अपने ननिहाल गई थी। दोपहर के समय वह पड़ोस में रहने वाले अपने सगे मामा के घर खेलने चली गई। घर में अकेला पाकर दोषी मामा ने मासूम के साथ इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया। शाम को जब बच्ची घर लौटी तो वह बेहद घबराई हुई थी। रात को सोते समय जब मां ने प्यार से पूछा, तो बच्ची रो पड़ी और मामा की करतूत के बारे में बताया। दोषी ने मासूम को जान से मारने की धमकी भी दी थी। इस मामले में 5 दिसंबर 2024 को महिला पुलिस थाना शिमला में पॉक्सो एक्ट और अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया।
कोर्ट ने खारिज की बचाव पक्ष की दलील
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि पुलिस में एफआईआर (FIR) घटना के पांच दिन बाद दर्ज कराई गई है, जो कि इस मामले को संदिग्ध बनाती है। अदालत ने इस दलील को पूरी तरह से खारिज करते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की। माननीय न्यायाधीश ने कहा कि बाल यौन शोषण और करीबी रिश्तेदारों से जुड़े मामलों में परिवार का तुरंत पुलिस के पास न जाना स्वाभाविक है। ऐसे मामलों में लोक-लाज, गहरा सदमा और सामाजिक संकोच के कारण शिकायत दर्ज कराने में देरी होना आम बात है, इसे संदिग्ध नहीं माना जा सकता।
