एआरबी टाइम्स ब्यूरो | ऊना
कांगड़ा सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (केसीसीबी) से जुड़े एक बहुचर्चित होटल लोन मामले में बड़ा एक्शन सामने आया है। बैंक के तत्कालीन प्रबंध निदेशक विनोद कुमार सहित कुल नौ अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ थाना सदर ऊना में एफआईआर दर्ज की गई है। यह केस जिला मंडी के गांव भूरा निवासी होटल व्यवसायी युद्ध चंद बैंस की शिकायत पर दर्ज किया गया है।
एफआईआर के अनुसार शिकायतकर्ता ने वर्ष 2016 में केसीसीबी ऊना से अपने होटल प्रोजेक्ट के लिए लगभग 12 करोड़ रुपये का टर्म लोन स्वीकृत करवाया था। लोन के बदले दोनों होटल संपत्तियों को बैंक के पास गिरवी रखा गया था। आरोप है कि लोन स्वीकृत होने के बावजूद बैंक ने पूरी राशि समय पर जारी नहीं की। अनियमित और देरी से किए गए भुगतान के कारण होटल प्रोजेक्ट को गंभीर आर्थिक नुकसान हुआ। शिकायतकर्ता के अनुसार प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 240 करोड़ रुपये थी, लेकिन बैंक अधिकारियों की कथित लापरवाही और गलत नीतियों के चलते प्रोजेक्ट प्रभावित हुआ।
गिरवी संपत्तियों के रिजर्व प्राइस और वैल्यूएशन रिकॉर्ड में की हेराफेरी
एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि बैंक अधिकारियों ने गिरवी संपत्तियों के रिजर्व प्राइस और वैल्यूएशन रिकॉर्ड में हेराफेरी की। बैंक फाइल से महत्वपूर्ण ऑफिस नोटिंग्स हटाई गईं और कुछ पन्ने जानबूझकर गायब कर दिए गए। चूंकि ये सभी दस्तावेज बैंक की कस्टडी में थे, इसलिए इनकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों पर बनती है। शिकायतकर्ता का दावा है कि आरबीआई की गाइडलाइन और कोविड-19 के दौरान लागू मोरेटोरियम के बावजूद वर्ष 2021 में लोन खाते को गलत तरीके से एनपीए घोषित कर दिया गया। इसके बाद मामला हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट और डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल चंडीगढ़ तक पहुंच गया। सूचना का अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में यह सामने आया कि केसीसीबी की रिकवरी शाखा से लोन फाइल के कई महत्वपूर्ण पन्ने, खासकर रिजर्व प्राइस फिक्सेशन और वैल्यूएशन से जुड़े रिकॉर्ड, गायब हैं। आरोप है कि यह सब जानबूझकर किया गया ताकि संपत्तियों का मूल्य कम दिखाकर रिकवरी प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सके।
इस मामले में जिन अधिकारियों और कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया है, उनमें तत्कालीन एमडी विनोद कुमार, राकेश शर्मा (तत्कालीन डीजीएम/जनरल मैनेजर रिकवरी), कुलदीप भारद्वाज (डीजीएम रिकवरी), वीनू शर्मा, सतीश कुमारी, सुरजीत राणा (तीनों एजीएम), दिनेश शर्मा (ग्रेड-III) और बाबू राम (ग्रेड-IV) शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान लोन फाइल, वैल्यूएशन रिपोर्ट, आरटीआई जवाब, रिकवरी रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच की जाएगी।
