एआरबी टाइम्स ब्यूरो | मंडी
हिमाचल प्रदेश राज्य हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम (हिमक्राफ्ट) मंडी द्वारा अप्पर बिजनी में आयोजित मंडी कलम चित्रकला एवं शिल्प कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन हुआ। समापन समारोह की अध्यक्षता उपायुक्त अपूर्व देवगन ने की। इस अवसर पर उन्होंने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित कर उनके प्रयासों की सराहना की और उनका उत्साहवर्धन किया।
उपायुक्त अपूर्व देवगन ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के कौशल विकास और पारंपरिक कलाओं के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत है। मंडी कलम जैसी प्राचीन लघु चित्रकला शैली को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से इस प्रकार की कार्यशालाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी अभिरुचि के अनुसार इस कला से जुड़ने और इसे आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि मंडी अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं के संरक्षण के लिए जाना जाता है। यहां विकसित हुई मंडी कलम चित्रकला आज भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है और धीरे-धीरे इसका विस्तार हो रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि युवाओं की भागीदारी से यह कला और अधिक समृद्ध होगी।
उपायुक्त ने बताया कि एक माह तक चली इस कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने बेहद आकर्षक और रचनात्मक पेंटिंग्स तैयार की हैं। उन्होंने कहा कि इन कृतियों को आम जनता तक पहुंचाने के लिए एक प्रदर्शनी आयोजित करने पर भी विचार किया जाएगा, जिससे कलाकारों को पहचान और प्रोत्साहन मिल सके।
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि मंडी कलम लघु चित्रकला की परंपरा सदियों पुरानी है और सोलहवीं से उन्नीसवीं सदी के बीच यह अपने चरम पर थी। इस कला में स्थानीय लोककथाओं, प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक विषयों का जीवंत चित्रण किया जाता है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी कारीगरों और कलाकारों द्वारा संरक्षित किया गया है।
कार्यक्रम में हिमक्राफ्ट के जिला प्रभारी अक्षय सिंह डोड ने उपायुक्त का स्वागत किया और उन्हें मंडी कलम पर आधारित एक सुंदर पेंटिंग भेंट की। उन्होंने बताया कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) द्वारा प्रायोजित इस कार्यशाला में 20 महिला कारीगरों ने भाग लिया। प्रतिभागियों को मंडी कलम चित्रकला के साथ-साथ डिजाइनिंग, कौशल उन्नयन और उद्यमिता विकास का प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया।
इस कार्यशाला में मास्टर क्राफ्ट पर्सन राजेश कुमार और डिजाइनर अंशुल मल्होत्रा ने प्रशिक्षण देकर प्रतिभागियों को इस पारंपरिक कला की बारीकियों से अवगत कराया।
