एआरबी टाइम्स ब्यूरो | रामपुर बुशहर
रामपुर शहर और आसपास के क्षेत्रों में बंदरों के बढ़ते हमलों ने आम जनता की सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उप-मंडलाधिकारी (एसडीएम) रामपुर, हर्ष अमरेंद्र सिंह ने नगर परिषद को तत्काल प्रभाव से ठोस कदम उठाने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जन सुरक्षा के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
एक वर्ष में बढ़े हमले, बुजुर्ग हुए शिकार
आधिकारिक आंकड़ों और स्थानीय शिकायतों के अनुसार, पिछले एक वर्ष के दौरान रामपुर में बंदरों के काटने के मामलों में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। हाल ही में एक बुजुर्ग व्यक्ति पर हुए हमले ने स्थानीय निवासियों के बीच भारी आक्रोश और भय पैदा कर दिया था। स्थानीय लोग लंबे समय से प्रशासन से इस आतंक से निजात दिलाने की मांग कर रहे थे।
वन विभाग के साथ मिलकर चलेगा अभियान
एसडीएम द्वारा जारी आदेश के अनुसार, नगर परिषद रामपुर बुशहर को वन विभाग के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने को कहा गया है। प्रशासन ने एक सप्ताह की समय-सीमा निर्धारित करते हुए बंदरों को पकड़ने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। अभियान के तहत विशेष रूप से उन बंदरों को प्राथमिकता के आधार पर पकड़ा जाएगा जो अधिक आक्रामक हो चुके हैं।
टुटू और कंडी केंद्रों में होगी नसबंदी
पकड़े गए बंदरों को वैज्ञानिक विधि से नसबंदी (स्टरलाइजेशन) के लिए शिमला स्थित टुटू और कंडी नसबंदी केंद्रों में भेजा जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी स्वयं एसडीएम कार्यालय करेगा। नगर परिषद को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे इस अभियान की प्रगति रिपोर्ट नियमित अंतराल पर प्रशासन को सौंपें।
“जन सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। बंदरों के आतंक को कम करने के लिए नगर परिषद और वन विभाग को सामूहिक रूप से काम करने के आदेश दिए गए हैं। यदि इस कार्य में देरी होती है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।” — हर्ष अमरेंद्र सिंह, एसडीएम रामपुर
उच्चाधिकारियों को भेजी गई रिपोर्ट
प्रशासन की इस सख्ती की सूचना शहरी विकास निदेशक, उपायुक्त शिमला और वन मंडलाधिकारी रामपुर को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु भेज दी गई है। इस कदम से स्थानीय व्यापार मंडल और आम जनता ने राहत की सांस ली है और उम्मीद जताई है कि जल्द ही शहर की सड़कें और गलियां सुरक्षित होंगी।
