एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
हिमाचल हाईकोर्ट ने हिमकेयर योजना के तहत निजी अस्पतालों का भुगतान रोकने के राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है। अदालत ने कड़े शब्दों में कहा कि केवल विजिलेंस जांच का हवाला देकर निजी अस्पतालों की लंबित बकाया राशि का भुगतान रोकना न्यायालय के पूर्व आदेशों के अनुरूप नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
हिमाचल हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से स्वास्थ्य सचिव की 30 मई 2026 को जारी पत्र अदालत के समक्ष रखा गया, जिसमें कहा गया है कि हिमकेयर योजना से जुड़े मामलों में विजिलेंस जांच पूरी होने तक निजी अस्पतालों को कोई भुगतान नहीं किया जाएगा। हालांकि सरकारी अस्पतालों को भुगतान जारी रखने की बात कही गई थी। इस पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है कि अदालत के पूर्व आदेशों की अवहेलना करने पर उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। सरकार ने हिमाचल हाईकोर्ट को बताया कि डायलिसिस मामलों से जुड़े 13,778 दावों के लिए 20.35 लाख रुपये और गैर-डायलिसिस मामलों के 7,633 दावों के लिए 87.22 लाख रुपये जारी किए गए हैं। अदालत ने दावा सत्यापन प्रक्रिया की धीमी गति पर नाराजगी जताई।
निजी अस्पतालों ने लगाए उत्पीड़न के आरोप
याचिकाकर्ता निजी अस्पतालों ने अदालत को बताया कि सत्यापन के नाम पर अनावश्यक स्पष्टीकरण मांगे जा रहे हैं, जिससे भुगतान प्रक्रिया लंबी होती जा रही है। अस्पतालों का आरोप है कि इससे उनके वित्तीय संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। महाधिवक्ता ने अदालत को आश्वस्त किया कि जांच के नाम पर अस्पतालों पर कोई अनुचित दबाव नहीं बनाया जाएगा और गैर-जरूरी सवालों के कारण भुगतान में देरी नहीं होगी। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई से पहले पूरी तरह सत्यापित और स्वीकृत दावों का भुगतान संबंधित निजी अस्पतालों को किया जाए। साथ ही सत्यापन प्रक्रिया को तेज करने और लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे के भी निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 25 जून 2026 को होगी।
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