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    HPU: एचपीयू में नियुक्तियों और पदोन्नतियों में कथित घोटालों की उच्चस्तरीय जांच हो, दोषियों पर एफआईआर दर्ज की जाए: एसएफआई

    एसएफआई एचपीयू इकाई ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में नियुक्तियों, पदोन्नतियों, यूजीसी-सीएएस लाभों और फीस वृद्धि में कथित अनियमितताओं को लेकर रजिस्ट्रार का घेराव किया। संगठन ने एसआईटी जांच, एफआईआर और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
    ATUL RAJBy ATUL RAJJune 23, 2026No Comments4 Mins Read
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    एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला

    स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) इकाई ने विश्वविद्यालय में नियुक्तियों, पदोन्नतियों तथा यूजीसी-कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत दिए गए वित्तीय लाभों में कथित अनियमितताओं को लेकर एक बार फिर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने मंगलवार को विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार का घेराव करते हुए 19 मई को सौंपे गए पांच ज्ञापनों पर की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी और आरोप लगाया कि एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद प्रशासन ने किसी भी मामले में ठोस कदम नहीं उठाए हैं।

    एसएफआई का आरोप है कि डिपार्टमेंट ऑफ लाइफ लॉन्ग लर्निंग (डीएलएल) में असिस्टेंट प्रोफेसर (अर्थशास्त्र) की नियुक्ति के लिए यूजीसी नियमों के विपरीत पात्रता शर्तों में बदलाव कर एक विशेष व्यक्ति को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया। संगठन के अनुसार बिना किसी वैधानिक निकाय की मंजूरी के “पांच वर्ष का शोध अनुभव” अनिवार्य बनाकर भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। एसएफआई ने इस मामले में तत्कालीन रजिस्ट्रार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग की है।

    दूसरे ज्ञापन में संगठन ने इंस्टीट्यूट ऑफ वोकेशनल स्टडीज (आईवीएस) में प्रोफेसर पद पर हुई नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं। एसएफआई का कहना है कि संबंधित व्यक्ति ने यूजीसी द्वारा निर्धारित न्यूनतम सेवा अवधि पूरी नहीं की थी, इसके बावजूद उसे प्रोफेसर नियुक्त कर दिया गया। संगठन ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने समान प्रकार की सेवाओं की अलग-अलग मामलों में अलग-अलग व्याख्या कर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया है। एसएफआई ने मामले की स्वतंत्र जांच पूरी होने तक संबंधित व्यक्ति को दिए जा रहे सभी वित्तीय और प्रशासनिक लाभ रोकने की मांग की है।

    संगठन ने तीसरे ज्ञापन में यूजीसी-कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत हुई नियुक्तियों और पदोन्नतियों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। एसएफआई के अनुसार कई शिक्षकों को नियमों के विपरीत पूर्व प्रभाव से पदोन्नतियां प्रदान की गईं और करोड़ों रुपये के एरियर का भुगतान किया गया। संगठन का आरोप है कि कुछ मामलों में आवश्यक सेवा अवधि पूरी किए बिना ही प्रोफेसर पद के लाभ दिए गए, जबकि गैर-शैक्षणिक पदों को भी कथित रूप से शैक्षणिक पदों के समकक्ष मानकर लाभ प्रदान किए गए।

    एसएफआई ने कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की टिप्पणियों ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। संगठन का आरोप है कि करोड़ों रुपये के सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया गया, जबकि दूसरी ओर छात्रों पर लगातार फीस वृद्धि का बोझ डाला जा रहा है।

    संगठन ने मांग की है कि वर्ष 2010 और 2018 के बाद यूजीसी-सीएएस के तहत हुई सभी नियुक्तियों और पदोन्नतियों की न्यायिक अथवा एसआईटी जांच करवाई जाए। साथ ही अवैध रूप से प्राप्त वित्तीय लाभों की वसूली की जाए तथा दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए।

    एसएफआई ने विश्वविद्यालय में ईआरपी प्रणाली पर 20 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद छात्रों के परिणामों और प्रशासनिक सेवाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार फीस वृद्धि कर छात्रों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रहा है।

    संगठन के अनुसार हाल ही में बढ़ाई गई फीस का असर प्रवेश प्रक्रिया पर भी दिखाई देने लगा है। सोशल वर्क, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, एमए डिफेंस स्टडीज, आर्कियोलॉजी और एमएआरडी सहित कई विभागों में प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले छात्रों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। एसएफआई का कहना है कि फीस वृद्धि का यह निर्णय आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब छात्रों को उच्च शिक्षा से वंचित करने वाला साबित हो सकता है।

    एसएफआई परिसर सचिव मुकेश ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन इन गंभीर मामलों में शीघ्र और पारदर्शी कार्रवाई नहीं करता है तो संगठन छात्रों को संगठित कर व्यापक आंदोलन शुरू करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।

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    अतुल राज ARB Times के एडिटर हैं और डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव रखते हैं। समसामयिक घटनाओं, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है। निष्पक्ष, तथ्यपरक और विश्लेषणात्मक पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हुए वे पाठकों तक सटीक और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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