एआरबी टाइम्स ब्यूरो, रामपुर बुशहर
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में बढ़ाई गई फीस वापस लेने, छात्र संघ चुनाव (SCA) बहाल करने और 186 प्रोफेसर भर्तियों के मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की रामपुर इकाई ने प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने प्रदेश सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की तथा मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और HPU के कुलपति प्रो. महावीर वर्मा का पुतला दहन कर विरोध जताया।
प्रदर्शन के दौरान SFI के कैंपस उपाध्यक्ष मुकेश ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी प्रशासनिक और वित्तीय नाकामियों का बोझ फीस वृद्धि के रूप में आम छात्रों पर डाल रहा है। उन्होंने कहा कि फीस बढ़ने से गरीब और सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना और मुश्किल हो जाएगा।
SFI कार्यकर्ता समीर ने CAG रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि वर्ष 2020 से 2022 के बीच हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में 186 प्रोफेसरों की भर्तियां गैरकानूनी तरीके से की गईं। उन्होंने कहा कि इन नियुक्तियों के कारण विश्वविद्यालय पर आर्थिक बोझ बढ़ा और अब इसकी भरपाई का भार छात्रों पर फीस वृद्धि के माध्यम से डाला जा रहा है। उन्होंने इन भर्तियों की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
चमन ने कहा कि विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव बंद होने के बाद छात्रों के पास अपनी समस्याओं और अधिकारों को उठाने के लिए कोई लोकतांत्रिक मंच नहीं बचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका फायदा उठाकर प्रशासन छात्र विरोधी फैसले ले रहा है।
उन्होंने कहा कि SFI के आंदोलन के दबाव में विश्वविद्यालय प्रशासन ने बढ़ाई गई फीस के कई हिस्सों को वापस लिया है, लेकिन कुछ प्रतिशत फीस में कटौती पर्याप्त नहीं है। SFI की मांग है कि फीस वृद्धि को पूरी तरह वापस लिया जाए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर छात्र भी विश्वविद्यालय में अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती फीस के कारण उच्च शिक्षा में छात्रों का नामांकन और प्रभावित हो सकता है।
चमन ने कहा कि SFI इस आंदोलन को प्रदेश के शिक्षण संस्थानों तक ले जाएगी और फीस वृद्धि पूरी तरह वापस होने तक संघर्ष जारी रहेगा।
वहीं, पीयूष ने कहा कि SFI ने प्रदेश सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द बढ़ाई गई फीस वापस नहीं ली गई, कथित अवैध भर्तियों के मामले में कार्रवाई नहीं हुई और छात्र संघ चुनाव बहाल नहीं किए गए, तो संगठन पूरे प्रदेश में व्यापक आंदोलन शुरू करेगा। इसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
