एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला | हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के दो प्रमुख विश्वविद्यालयों—चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय (पालमपुर) और डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय (नौणी, सोलन) में VC नियुक्ति से जुड़े राज्य सरकार के संशोधन अधिनियम और नियमों को असंवैधानिक (Unconstitutional) करार देते हुए पूरी तरह रद्द कर दिया है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार द्वारा 26 फरवरी 2026 को दोनों विश्वविद्यालयों में VC पदों के लिए जारी विज्ञापनों को भी तुरंत प्रभाव से निरस्त कर दिया है।
यूजीसी (UGC) नियमों के तहत दोबारा होगी प्रक्रिया
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और कुलाधिपति (राज्यपाल) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि दोनों विश्वविद्यालयों में कुलपतियों के चयन और नियुक्ति की प्रक्रिया यूजीसी विनियम 2018 (UGC Regulations 2018) के तहत नए सिरे से शुरू की जाए।
चयन समिति का पुनर्गठन: नई सर्च कम चयन समिति में यूजीसी (UGC) अध्यक्ष का एक मनोनीत प्रतिनिधि शामिल करना अनिवार्य होगा।
सरकारी अधिकारियों की छुट्टी: विश्वविद्यालय से सीधे जुड़े प्रशासनिक अधिकारियों, जैसे मुख्य सचिव (Chief Secretary), को चयन समिति से बाहर रखा जाएगा।
ICAR का प्रतिनिधित्व: यदि आवश्यक समझा जाए, तो भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के प्रतिनिधि को भी समिति में स्थान दिया जा सकता है।
कोर्ट ने किन संशोधनों और नियमों को माना अवैध?
हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश कृषि, औद्यानिकी एवं वानिकी (संशोधन) अधिनियम, 2023 की धारा 23(4) व धारा 24 में किए गए संशोधनों को अधिकार क्षेत्र से बाहर (Ultra Vires) करार दिया। इसके साथ ही नियम 2026 के नियम 2, 3 और 4 को प्रारंभ से ही शून्य (Void ab initio) घोषित कर दिया।
