एआरबी टाइम्स ब्यूरो, नाहन | हिमाचल प्रदेश में रासायनिक खाद की बिक्री और वितरण व्यवस्था में बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था के तहत किसानों को खाद लेने के लिए किसान पहचान पत्र और आधार कार्ड जरूरी होगा। इसके बिना खाद की ऑनलाइन बुकिंग और आपूर्ति की प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकेगी। नई व्यवस्था में किसान की कृषि योग्य भूमि के रकबे के आधार पर डिजिटल माध्यम से खाद का कोटा तय किया जाएगा। इसका उद्देश्य खाद के वितरण में पारदर्शिता और कालाबाजारी पर रोक लगाना है।
सरकारी उपक्रम हिमफेड ने किसानों से अपील की है कि खाद की आवश्यकता होने से पहले अपना किसान पहचान पत्र और आधार संबंधी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर लें। किसान पहचान पत्र के बिना ऑनलाइन बुकिंग नहीं हो सकेगी। ऐसे में खाद की जरूरत के समय किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। नई डिजिटल व्यवस्था के तहत किसान मोबाइल एप के माध्यम से अपनी जरूरत के अनुसार रासायनिक खाद की एडवांस बुकिंग कर सकेंगे। बुकिंग पूरी होने के बाद किसान को एक QR कोड उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बाद किसान को अधिकृत खाद विक्रय केंद्र पर जाकर यह QR कोड दिखाना होगा। डिजिटल प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही किसान को खाद उपलब्ध करवाई जाएगी।
जमीन के रकबे के हिसाब से तय होगा खाद का कोटा
नई व्यवस्था में किसान पहचान पत्र को उसकी कृषि भूमि के रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा। किसान के पास कितनी कृषि योग्य भूमि है, इसी आधार पर डिजिटल प्रणाली के माध्यम से खाद का आवंटन किया जाएगा। इससे खाद की उपलब्धता और वितरण का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से दर्ज रहेगा और निर्धारित मात्रा से अधिक खाद लेने की संभावना को नियंत्रित किया जा सकेगा।
लोकमित्र केंद्र से बनवा सकते हैं किसान पहचान पत्र
जिन किसानों ने अभी तक किसान पहचान पत्र नहीं बनवाया है, वे अपने नजदीकी लोकमित्र केंद्र या साझा सेवा केंद्र में जाकर पंजीकरण करवा सकते हैं। पंजीकरण के लिए किसानों को सामान्य तौर पर ये दस्तावेज साथ ले जाने होंगे।
- आधार कार्ड
- जमीन के दस्तावेज, जैसे जमाबंदी या ताजा भू-अभिलेख
- सक्रिय मोबाइल नंबर
किसानों से अपील की गई है कि वे खाद की जरूरत पड़ने से पहले किसान पहचान पत्र और आधार से जुड़ी प्रक्रिया पूरी कर लें, ताकि फसल के मौसम में खाद की बुकिंग और उठान के समय किसी तरह की परेशानी न हो। नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य रासायनिक खाद के वितरण को पारदर्शी बनाना, कालाबाजारी रोकना और वास्तविक किसानों तक खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। किसान पहचान पत्र के माध्यम से किसान और उसकी जमीन का विवरण डिजिटल रूप से उपलब्ध रहेगा।
