एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
शिमला जिला परिषद को लंबे इंतजार के बाद आखिरकार अध्यक्ष और उपाध्यक्ष मिल गए हैं। वीरवार को बचत भवन शिमला में आयोजित चुनाव में भाजपा समर्थित भूपेंद्र सिसोदिया अध्यक्ष और भरत सिंह कलांटा उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए। चुनाव परिणाम सामने आते ही भाजपा कार्यकर्ताओं ने शिमला में विजय जुलूस निकाला और लड्डू बांटकर जीत का जश्न मनाया। शिमला जिला परिषद पर करीब दो दशक से कांग्रेस का प्रभाव रहा है। भाजपा की कांग्रेस के गढ़ में सेंधमारी से सत्तारूढ़ पार्टी को करारा झटका लगा है।
जिला परिषद अध्यक्ष पद के लिए भाजपा के भूपेंद्र सिसोदिया और कांग्रेस के सुरेंद्र रेटका आमने-सामने थे। मतदान में भूपेंद्र सिसोदिया को 13 मत, जबकि सुरेंद्र रेटका को 10 मत मिले। दो मत अवैध घोषित किए गए। इसके बाद भूपेंद्र सिसोदिया को अध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया गया। उपाध्यक्ष पद के लिए निर्दलीय प्रत्याशी भरत सिंह कलांटा और कांग्रेस की मीनाक्षी के बीच मुकाबला हुआ। भरत सिंह कलांटा को 14 मत, जबकि मीनाक्षी को 10 मत मिले। एक मत अवैध घोषित हुआ। इस तरह कलांटा जिला परिषद शिमला के उपाध्यक्ष चुने गए। चुनाव प्रक्रिया उपायुक्त शिमला एवं पीठासीन अधिकारी अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में हुई। निर्वाचन पूरा होने के बाद उपायुक्त ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह सिसोदिया और उपाध्यक्ष भरत सिंह कलांटा को निर्धारित शपथ दिलाई। उपायुक्त ने दोनों नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि वे जिला परिषद की जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ करेंगे। जिला परिषद ग्रामीण विकास और जनकल्याण से जुड़े कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

31 मई को हुए थे पंचायती राज चुनाव
हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव 31 मई 2026 को हुए थे। इसके बाद जिला परिषद शिमला में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई थी। चुनाव में देरी का मामला हाईकोर्ट तक भी पहुंचा। अगस्त के पहले सप्ताह में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए बैठक बुलाई गई थी, लेकिन उस समय कांग्रेस और भाजपा दोनों पक्षों के सदस्यों के बैठक से दूर रहने के कारण चुनाव नहीं हो सका था।
यह लोकतंत्र की जीत है। सत्ता के दुरुपयोग से जनादेश को हथियाने वालों की हार है। सरकार ने जनादेश को प्रभावित करने के लिए तमाम हथकंडे अपनाए, लेकिन उसके सभी प्रयास नाकाम साबित हुए। सत्ता के दम पर लोकतंत्र को चोट पहुंचाने की उनकी कोशिशों को जनता के प्रतिनिधियों ने करारा जवाब दिया है। मुख्यमंत्री इस हार से सबक लें और लोकतंत्र, जनादेश का सम्मान करें। संस्थाओं को कमजोर करने के बजाय जनभावनाओं का सम्मान करना ही लोकतंत्र की सच्ची मर्यादा है। -जयराम ठाकुर, पूर्व मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश
