एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला | हिमाचल प्रदेश समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में फल, सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों में कीटनाशकों के अवशेष तय सीमा से अधिक पाए गए हैं। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 से 2026 के बीच हिमाचल प्रदेश में जांच किए गए 5,765 नमूनों में से 92 सैंपलों में कीटनाशकों के अवशेष निर्धारित अधिकतम सीमा से ज्यादा मिले हैं। इससे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और लोगों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
रिपोर्ट में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान के नमूनों की जांच के आंकड़े भी शामिल हैं। पंजाब में 6,580 नमूनों में से 55, जबकि हरियाणा में 2,371 में से 152 नमूनों में कीटनाशक अवशेष निर्धारित सीमा से अधिक पाए गए। जम्मू-कश्मीर में 1,489 में से 58 और राजस्थान में 3,564 में से 111 नमूने तय मानकों से अधिक अवशेष वाले पाए गए। रिपोर्ट के अनुसार फल, सब्जियों, मसालों, अनाज, दालों और अन्य खाद्य पदार्थों के नमूने अलग-अलग स्थानों से लिए गए। इनमें खुदरा दुकानें, थोक बाजार, सहकारी समितियां, कृषि उपज मंडी समिति यानी एपीएमसी बाजार, सीधे खेतों से लिए गए नमूने और जैविक उत्पाद बेचने वाले केंद्र शामिल हैं। इन नमूनों को देशभर की करीब 40 प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजा गया। जांच का उद्देश्य खाद्य पदार्थों में कीटनाशकों के अवशेषों की संभावित मौजूदगी और उनकी मात्रा का पता लगाना था।
तय सीमा से ज्यादा अवशेष स्वास्थ्य के लिए चिंता
खाद्य पदार्थों में कीटनाशकों के अवशेष यदि निर्धारित सीमा से अधिक हों और लंबे समय तक उनका सेवन होता रहे तो स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार कीटनाशकों के संपर्क में आने की मात्रा, अवधि और संबंधित रसायन के प्रकार के आधार पर स्वास्थ्य जोखिम अलग-अलग हो सकते हैं। अत्यधिक संपर्क से तत्काल सिरदर्द, चक्कर, उल्टी, पेट दर्द और अन्य लक्षण हो सकते हैं। वहीं लंबे समय तक कुछ कीटनाशकों के संपर्क में रहने को हार्मोन संबंधी गड़बड़ी, तंत्रिका तंत्र, लिवर और किडनी पर असर सहित अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़ा गया है। हालांकि हर कीटनाशक का प्रभाव एक जैसा नहीं होता और स्वास्थ्य जोखिम का आकलन संबंधित रसायन के आधार पर किया जाता है।
हिमाचल में 5,765 नमूनों की हुई जांच
हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2023 से 2026 के दौरान कुल 5,765 नमूनों की जांच की गई। इनमें 92 नमूनों में कीटनाशकों के अवशेष निर्धारित सीमा से अधिक पाए गए। प्रदेश में बड़ी संख्या में फल और सब्जियों का उत्पादन होता है। सेब समेत कई फसलों में कीट और रोग नियंत्रण के लिए विभिन्न कृषि रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में निर्धारित मात्रा, सही समय और वैज्ञानिक तरीके से कीटनाशकों का इस्तेमाल करना खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
पंजाब और हरियाणा के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले
रिपोर्ट में पड़ोसी राज्यों पंजाब और हरियाणा के आंकड़े भी सामने आए हैं। पंजाब में 6,580 नमूनों में से 55 सैंपल निर्धारित सीमा से अधिक अवशेष वाले पाए गए। वहीं हरियाणा में 2,371 नमूनों में से 152 सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे। जम्मू-कश्मीर में 1,489 नमूनों में से 58 और राजस्थान में 3,564 नमूनों में से 111 नमूनों में निर्धारित सीमा से अधिक कीटनाशक अवशेष मिले।
बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सावधानी
विशेषज्ञों के अनुसार कीटनाशकों के संपर्क को कम करना जरूरी है। बच्चों और गर्भवती महिलाओं के मामले में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। फल और सब्जियों को खाने से पहले साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। जिन खाद्य पदार्थों को छीलकर खाया जा सकता है, उन्हें छीलना भी कुछ सतही अवशेषों को कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि, केवल धोने या छीलने से सभी प्रकार के कीटनाशक अवशेष पूरी तरह खत्म हो जाएं, यह जरूरी नहीं है। इसलिए कृषि स्तर पर सुरक्षित और निर्धारित मात्रा में कीटनाशकों का इस्तेमाल तथा खाद्य पदार्थों की नियमित जांच सबसे महत्वपूर्ण उपाय हैं।
