एआरबी टाइम्स ब्यूरो, कुल्लू
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बुधवार हिमाचल प्रदेश के रोहतांग स्थित अटल टनल पहुंचीं। उन्होंने टनल का अवलोकन करने के साथ ही सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के अधिकारियों से इसके निर्माण और तकनीकी विशेषताओं की जानकारी ली। राष्ट्रपति ने अटल टनल को विश्वस्तरीय इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए बीआरओ के प्रयासों की सराहना की।
लंबा ऊनी कोट पहनकर अटल टनल पहुंचीं राष्ट्रपति ने टनल के उत्तरी छोर के समीप रुककर आसपास के बर्फ से ढके पहाड़ी क्षेत्र का नजारा लिया और फोटो भी खिंचवाए। उन्होंने ब्यास कुंड और धुंधी की बर्फ से ढकी पहाड़ियों को भी निहारा। इस दौरान क्षेत्र में बादल छाए रहे और ऊंची पहाड़ियों पर बर्फबारी जारी रही।

राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अटल टनल के दौरे से जुड़े अपने विचार साझा करते हुए कहा कि यह भारत की तकनीकी क्षमता, दृढ़ संकल्प और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि सीमा सड़क संगठन ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में इस महत्वपूर्ण परियोजना का निर्माण कर देश की इंजीनियरिंग क्षमता का परिचय दिया है।
डीजी बीआरओ ने दी टनल की जानकारी
बीआरओ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने राष्ट्रपति को अटल टनल और इसके निर्माण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। राष्ट्रपति ने अटल टनल म्यूजियम का भी अवलोकन किया और विजिटर रजिस्टर में अपने हस्ताक्षर किए। द्रौपदी मुर्मु अटल टनल का दौरा करने वाली दूसरी राष्ट्रपति हैं। इससे पहले तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वर्ष 2022 में टनल का दौरा किया था।
राष्ट्रपति के साथ उनकी बेटी इतिश्री मुर्मु भी मौजूद रहीं। प्रदेश के मंत्री राजेश धर्माणी, विधायक भुवनेश्वर गौड़ और विधायक अनुराधा राणा भी इस दौरान उनके साथ रहे। रास्ते में कई स्थानों पर सड़क किनारे खड़े लोगों ने राष्ट्रपति के काफिले को देखा। कुछ स्थानों पर राष्ट्रपति ने हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन भी किया।
राष्ट्रपति के दौरे को लेकर वाहनों की आवाजाही रही प्रतिबंधित
राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर अटल टनल में वाहनों की आवाजाही पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया। मंगलवार शाम से बुधवार दोपहर बाद तक भारी वाहनों को टनल से गुजरने की अनुमति नहीं रही। वहीं, छोटे वाहनों की आवाजाही भी बुधवार सुबह छह बजे से दोपहर दो बजे तक प्रतिबंधित रही। राष्ट्रपति के अटल टनल से लौटने के बाद यातायात सामान्य किया गया।
अटल टनल से सालभर जुड़ा लाहुल-स्पीति
रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण अटल टनल मनाली को लाहुल-स्पीति घाटी से वर्षभर जोड़ती है। करीब नौ किलोमीटर लंबी यह टनल रोहतांग के नीचे से गुजरती है और सर्दियों में भारी बर्फबारी के दौरान भी लाहुल क्षेत्र को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके निर्माण से सीमावर्ती क्षेत्रों तक आवश्यक रसद पहुंचाना भी आसान हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन अक्टूबर 2020 को अटल टनल का उद्घाटन किया था।
