कुल्लू | भगवान रघुनाथ की भव्य रथयात्रा के साथ बुधवार को अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा महोत्सव का आगाज हो गया। देवभूमि की समृद्ध देव संस्कृति, लोक परंपराओं और सामूहिक आस्था के प्रतीक इस उत्सव के लिए ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने उत्सव का विधिवत शुभारंभ किया। भगवान रघुनाथ सहित कुल्लू घाटी और आसपास के क्षेत्रों से आए 300 से अधिक देवी-देवताओं ने इस धार्मिक आयोजन में भाग लिया। 27 अक्तूबर तक चलने वाले सात दिवसीय महोत्सव में धार्मिक परंपराओं के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों और विभिन्न प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाएगा।
शाम 5:14 बजे शुरू हुई भगवान रघुनाथ की रथयात्रा
बुधवार शाम 4:22 बजे भगवान रघुनाथ पालकी में सवार होकर रथ मैदान पहुंचे। इसके बाद पूजा-अर्चना और पारंपरिक देव रीति-रिवाजों का निर्वहन किया गया। शाम 5:14 बजे जय श्रीराम के उद्घोष और देव वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच भगवान रघुनाथ की रथयात्रा ढालपुर की ओर रवाना हुई। शाम 5:25 बजे रथयात्रा भगवान रघुनाथ के अस्थायी शिविर में पहुंची। रथयात्रा के दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने रथ खींचकर अपनी आस्था प्रकट की। रास्ते में जगह-जगह खड़े लोगों ने भगवान रघुनाथ के दर्शन किए। बिजली महादेव, हिडिंबा माता, जवाणी महादेव और वीरनाथ सहित करीब 100 देवी-देवताओं ने रथयात्रा में भगवान रघुनाथ के साथ भाग लिया।
सात दिन तक ढालपुर में विराजमान रहेंगे देवी-देवता
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा महोत्सव के लिए करीब 300 देवी-देवता ढालपुर मैदान पहुंच चुके हैं। यहां बनाए गए अस्थायी शिविरों में देवी-देवता सात दिन तक विराजमान रहेंगे। देव परंपराओं के अनुसार श्रद्धालु इन शिविरों में पहुंचकर देवी-देवताओं के दर्शन करेंगे। रथयात्रा के दौरान पूरा ढालपुर मैदान भक्तिमय माहौल में डूबा रहा। देव वाद्ययंत्रों की धुनों, जयकारों और श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने कुल्लू घाटी के इस ऐतिहासिक उत्सव की रौनक बढ़ा दी। इस अवसर पर राज्यपाल कविंद्र गुप्ता, लेडी गवर्नर बिंदु गुप्ता, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल और हिमाचल कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।
कुल्लू दशहरा हिमाचल की देव संस्कृति का जीवंत प्रतीक: राज्यपाल

राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध देव संस्कृति, लोक परंपराओं, सामूहिक आस्था और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है। देव संस्कृति और लोक संस्कृति का अनूठा संगम इस उत्सव को विशिष्ट पहचान देता है और देश के सांस्कृतिक मानचित्र पर विशेष स्थान दिलाता है। उन्होंने कहा कि परंपराएं केवल अतीत की विरासत नहीं हैं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शन का स्रोत भी हैं। इनका संरक्षण करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। विजयदशमी के संदेश का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन सत्य, कर्तव्य, त्याग, न्याय और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने लोगों से नशाखोरी, हिंसा, भ्रष्टाचार और सामाजिक वैमनस्य जैसी बुराइयों के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होने का आह्वान किया।
पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय रोजगार पर दिया जोर
राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल के पर्वत, वन, नदियां और जैव विविधता अमूल्य प्राकृतिक संपदा हैं। प्रदेश की देव परंपराएं भी प्रकृति के प्रति सम्मान और सह-अस्तित्व का संदेश देती हैं। इसलिए विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा पर्यटन, स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पादों, रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण मंच है। उत्सव से मिलने वाले आर्थिक लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचने चाहिए और इसकी पारंपरिक पहचान भी संरक्षित रहनी चाहिए। राज्यपाल ने युवाओं से नशे से दूर रहने, नए कौशल सीखने, तकनीक और नवाचार अपनाने तथा अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने की अपील की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए नागरिकों से राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता मजबूत करने का आह्वान किया।
