शिमला | Himachal High Court ने कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर की एक सेवानिवृत्त वैज्ञानिक के एरियर का भुगतान रोकने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने डॉ. पूनम की याचिका स्वीकार करते हुए विश्वविद्यालय को 18,60,374 रुपये का एरियर 6 प्रतिशत ब्याज के साथ देने का आदेश दिया है। इसके अलावा, सेवानिवृत्त कर्मचारी को अनावश्यक मुकदमेबाजी में उलझाने के लिए विश्वविद्यालय पर 50,000 रुपये का हर्जाना भी लगाया गया है। न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने आदेशों की अनुपालना 9 नवंबर से पहले पूरी करने को कहा है।
अगस्त 1991 में सहायक वैज्ञानिक के पद पर हुई थीं नियुक्त
डॉ. पूनम अगस्त 1991 में सहायक वैज्ञानिक के पद पर नियुक्त हुई थीं। जनवरी 2023 में वह ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटर रिसर्च प्रोजेक्ट ऑन एग्रोफॉरेस्ट्री में प्रधान वैज्ञानिक के पद से सेवानिवृत्त हुईं। इस परियोजना में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन और एरियर का 75 प्रतिशत हिस्सा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और शेष 25 प्रतिशत राज्य सरकार की ओर से वहन किया जाता है। मार्च 2023 में आईसीएआर ने विश्वविद्यालय के छह कर्मचारियों के सातवें वेतन आयोग के बकाया भुगतान के लिए 42,97,603 रुपये जारी किए थे। इसमें डॉ. पूनम के एरियर का 75 प्रतिशत हिस्सा यानी 18,60,374 रुपये भी शामिल था।
एरियर की राशि एफडी में जमा करने पर उठे सवाल
हाईकोर्ट ने फैसले में स्पष्ट किया कि आईसीएआर की ओर से जारी धनराशि कर्मचारियों के बकाया एरियर के भुगतान के लिए थी। अदालत के अनुसार, जब कोई राशि विशेष उद्देश्य से प्राप्त हुई हो, तो उसका इस्तेमाल उसी उद्देश्य के लिए किया जाना चाहिए। विश्वविद्यालय को इस धनराशि को अपने खाते में रोकने या किसी अन्य मद में इस्तेमाल करने का कानूनी अधिकार नहीं था।
अदालत ने पाया कि विश्वविद्यालय ने आईसीएआर से मिली राशि कर्मचारियों को देने के बजाय अपने सेंट्रलाइज्ड फंड स्कीम खाते में स्थानांतरित कर दी और उसकी एफडी बना दी। इसके बाद 29 अप्रैल 2023 को विश्वविद्यालय ने आईसीएआर को उपयोगिता प्रमाणपत्र (यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट) भी जमा कराया, जिसमें राशि के इस्तेमाल की पुष्टि की गई थी। हालांकि, कर्मचारियों को एरियर का भुगतान नहीं किया गया था। विश्वविद्यालय की ओर से दलील दी गई कि वह राज्य सरकार से एरियर जारी करने के निर्देशों का इंतजार कर रहा था। हालांकि, राज्य के वित्त विभाग ने हाईकोर्ट में हलफनामा देकर इस दलील को खारिज किया। वित्त विभाग ने स्पष्ट किया कि आईसीएआर की ओर से जारी 75 प्रतिशत हिस्से के भुगतान पर राज्य सरकार ने कोई रोक नहीं लगाई थी। राज्य सरकार का रुख केवल अपने 25 प्रतिशत हिस्से तक सीमित था। अदालत ने माना कि आईसीएआर की ओर से पहले ही जारी की जा चुकी राशि को राज्य सरकार के निर्देशों का हवाला देकर रोकना तर्कसंगत नहीं था। हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय को एरियर पर 6 प्रतिशत ब्याज देने और 50,000 रुपये हर्जाने का भुगतान करने के आदेश दिए हैं।
