एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था में सरकार ने बड़े बदलाव का फैसला किया है। सरकार ने फैसला लिया है कि बोर्ड कक्षाओं को छोड़कर सभी कक्षाओं की नॉन बोर्ड वार्षिक परीक्षाएं अब दिसंबर में आयोजित की जाएंगी। साथ ही नया शैक्षणिक सत्र फरवरी से शुरू होगा। यह निर्णय बुधवार को सचिवालय में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में लिया गया। वर्तमान में ग्रीष्मकालीन अवकाश वाले स्कूलों में नॉन बोर्ड वार्षिक परीक्षाएं मार्च में होती थीं और अप्रैल से नया सत्र शुरू होता था, जबकि शीतकालीन स्कूलों में दिसंबर में परीक्षाएं होती थीं। अब पूरे प्रदेश में एक समान शैक्षणिक कैलेंडर लागू होगा।
खराब प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों पर होगी कार्रवाई
बैठक में हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के 10वीं और 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणामों की समीक्षा भी की गई। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने अधिकारियों को परिणामों का विस्तृत विश्लेषण करने और जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लगातार खराब प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों की वार्षिक वेतन वृद्धि रोकी जा सकती है। इसके अलावा सभी शिक्षकों और कर्मचारियों की बायोमैट्रिक उपस्थिति को अनिवार्य बनाने तथा अनुपालन न करने की स्थिति में वेतन कटौती जैसे कदम उठाने पर भी जोर दिया गया।
विद्यार्थियों के लिए शुरू होगी अप्रेंटिसशिप समाहित डिग्री
प्रदेश सरकार ने युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए नई पहल की घोषणा की है। स्नातक डिग्री पूरी कर चुके विद्यार्थियों के लिए अप्रेंटिसशिप समाहित डिग्री कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इस योजना के तहत छात्रों को विभिन्न उद्योगों में कार्य करने का अवसर मिलेगा और उन्हें स्टाइपेंड भी दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे छात्रों के कौशल विकास के साथ रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्रदेश के कॉलेजों में विदेशी भाषाओं के पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना पर भी काम चल रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की भाषा दक्षता प्रदान करना और वैश्विक रोजगार अवसरों के लिए तैयार करना है। उन्होंने बताया कि वीवॉक के तहत चार नए पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी की जा रही है, जिससे छात्रों को आधुनिक और रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध हो सके।
