एआरबी टाइम्स ब्यूरो, कुल्लू
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि प्रदेश में परीक्षाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए परीक्षा केंद्रों में लाइव निगरानी और ऑडियो-विजुअल रिकॉर्डिंग के निर्देश दिए गए हैं। नकल पर अंकुश लगाने के लिए बोर्ड निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के साथ प्रश्नपत्रों में भी बदलाव कर रहा है। वर्ष 2024 में नकल के 268 मामले सामने आए थे, जबकि इस बार इनकी संख्या घटकर 64 रह गई है।
डॉ. राजेश शर्मा शनिवार को कुल्लू के साई स्टार स्कूल, ढालपुर और पीएम श्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, भुंतर के दौरे के दौरान विद्यार्थियों और अध्यापकों से संवाद कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निर्देशों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने और परीक्षाओं में नकल के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति अपनाने पर जोर दिया जा रहा है।
एनईपी के अनुरूप बदलेगा परीक्षा पैटर्न
बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप परीक्षा प्रणाली में सुधार किए जा रहे हैं। प्रश्नपत्रों में रटने के बजाय विषयों की समझ, तार्किक क्षमता, विश्लेषणात्मक कौशल और व्यावहारिक ज्ञान को परखने वाले प्रश्नों को अधिक महत्व दिया जाएगा। विद्यार्थियों को नए पैटर्न से परिचित करवाने के लिए बोर्ड की वेबसाइट पर मॉडल प्रश्नपत्र भी उपलब्ध करवाए गए हैं। पाठ्यक्रम को एनसीईआरटी के अनुरूप रखने और अध्यापकों के प्रशिक्षण पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
शिक्षा सुधार में चार स्तंभों की भागीदारी जरूरी
डॉ. शर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों, अध्यापकों, अभिभावकों और आम नागरिकों के सहयोग से ही शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है। बोर्ड विभिन्न जिलों के शिक्षण संस्थानों का दौरा कर शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति जानने और संबंधित पक्षों से सुझाव लेने का प्रयास कर रहा है। भरमौर, किन्नौर, कांगड़ा और धर्मशाला के बाद कुल्लू में भी संवाद किया गया है। आगामी समय में प्रदेश के अन्य स्कूलों का दौरा किया जाएगा।
संस्कारों और नशामुक्ति पर भी जोर
उन्होंने विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और प्रामाणिक पाठ्यपुस्तकों का उपयोग करने तथा अधिकृत स्रोतों से बिल सहित पुस्तकें खरीदने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छे अंक हासिल करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है। बोर्ड पाठ्यक्रम में हिमाचल की संस्कृति, परंपराओं और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान से संबंधित विषयों को शामिल करने की दिशा में काम कर रहा है।
युवाओं में नशे के बढ़ते प्रचलन पर चिंता जताते हुए उन्होंने बोर्ड की टैगलाइन ‘शिक्षा युक्त हिमाचल, चिट्टा मुक्त हिमाचल’ का उल्लेख किया। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन करने, विषयों की बुनियादी अवधारणाओं को समझने और अपनी जिज्ञासाओं के समाधान के लिए अध्यापकों से संवाद बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।
