एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में सील्ड रोड परमिट फीस में कई गुना बढ़ोतरी और पुलिस की सख्ती के विरोध में वकील सड़कों पर उतर आए हैं। मंगलवार को बड़ी संख्या में एडवोकेट्स ने राज्य सचिवालय के बाहर धरना देते हुए प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान वकील “वीआईपी कल्चर नहीं चलेगा और अंग्रेजों के कानून नहीं चलेंगे जैसे नारे लगाते नजर आए। स्थिति को देखते हुए सचिवालय परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
जानकारी के अनुसार, इससे पहले वकील अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के सरकारी आवास ‘ओक ओवर’ पहुंचे थे। हालांकि मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं होने पर उनका आक्रोश बढ़ गया। इसके बाद वकीलों ने सचिवालय तक रैली निकाली और सड़क पर धरना शुरू कर दिया। वकीलों के धरने के कारण शिमला की लाइफलाइन मानी जाने वाली सर्कुलर रोड पर यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। ट्रैफिक जाम के चलते सैकड़ों लोग घंटों तक फंसे रहे।
सील्ड रोड परमिट फीस में कई गुना बढ़ोतरी से नाराज वकील
दरअसल, हिमाचल सरकार ने बजट सत्र के दौरान शिमला की सील्ड रोड पर वाहनों के लिए परमिट शुल्क में भारी बढ़ोतरी की है। पहले जहां वार्षिक परमिट शुल्क 2,500 रुपये था, उसे बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दिया गया है। इसी तरह दैनिक परमिट शुल्क 200 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये कर दिया गया है। वहीं प्रोसेसिंग फीस 100 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये किए जाने का भी प्रावधान किया गया है। इसके अलावा बिना परमिट वाहन चलाने पर 10,000 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। शिमला स्थित हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट भवन सील्ड रोड से जुड़ा हुआ है। ऐसे में बड़ी संख्या में वकीलों को इस मार्ग का उपयोग करना पड़ता है। वकीलों का कहना है कि नई व्यवस्था से उनके कामकाज पर असर पड़ेगा। उन्होंने मांग की है कि पहले की तरह उन्हें सील्ड रोड पर आवागमन की अनुमति दी जाए और बढ़ी हुई फीस वापस ली जाए। फिलहाल वकील मुख्यमंत्री से बातचीत और मांगों पर सकारात्मक निर्णय होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।

