एआरबी टाइम्स ब्यूरो | रामपुर बुशहर
नवरत्न सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड (एसजेवीएन) की 1500 मेगावाट और 412 मेगावाट परियोजनाओं में कार्यरत संविदा कर्मचारियों का शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन लगातार जारी है। दोनों परियोजनाओं के कर्मचारी अपनी लंबित मांगों, पूर्व में हुए समझौतों को लागू करने तथा श्रम कानूनों के कथित उल्लंघन के विरोध में एकजुट होकर आंदोलन कर रहे हैं। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र सकारात्मक वार्ता नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
1500 मेगावाट परियोजना में धरने को संबोधित करते हुए यूनियन अध्यक्ष राजकुमार ने आरोप लगाया कि प्रबंधन मजदूरों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार कर रहा है। उनका कहना था कि कुछ चुनिंदा कर्मचारियों को यात्रा भत्ता और बस सुविधा दोनों उपलब्ध कराई जा रही हैं, जबकि अन्य कर्मचारियों का यात्रा भत्ता काटा जा रहा है। उन्होंने इसे दोहरे मापदंड बताते हुए इसका विरोध किया।
यूनियन के उपाध्यक्ष गुरदास ने आरोप लगाया कि परियोजना में श्रम कानूनों का उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के वेतन से सितंबर 2025 का ईपीएफ अंशदान काटा गया, लेकिन वह अब तक संबंधित कर्मचारियों के ईपीएफ खातों में जमा नहीं कराया गया है। साथ ही वर्ष 2025 में हुए समझौतों को भी लागू नहीं किया गया है।
यूनियन सदस्य खुशी राम ने कहा कि प्रबंधन द्वारा चुनिंदा कर्मचारियों को विशेष सुविधाएं देकर अन्य कर्मचारियों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राइजिंग डे के अवसर पर 200 रुपये के कूपन के स्थान पर कुछ कर्मचारियों को दो घंटे के ओवरटाइम के बराबर नकद प्रोत्साहन राशि दी गई, जिससे कर्मचारियों में असंतोष है।
वहीं, 412 मेगावाट परियोजना में संविदा कर्मचारियों का धरना तीसरे दिन भी जारी रहा। यूनियन अध्यक्ष प्रमोद कुमार ने कहा कि 28 अगस्त 2025 को एएलसी कार्यालय, चंडीगढ़ में ग्रेच्युटी नीति लागू करने को लेकर हुए समझौते के बावजूद आज तक इसे लागू नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते प्रबंधन यूनियन के साथ सकारात्मक बातचीत नहीं करता तो संगठन अनिश्चितकालीन हड़ताल के लिए बाध्य होगा।
महासचिव तिलक राज ने कहा कि मार्च 2026 में परियोजना प्रमुख को दिए गए मांग-पत्र पर भी अब तक कोई सार्थक वार्ता नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2025 से अब तक हुए विभिन्न समझौतों और बैठकों के निर्णयों को लागू नहीं किया गया, जिससे कर्मचारियों में भारी असंतोष है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राइजिंग डे के अवसर पर केवल 1500 मेगावाट परियोजना के कुछ चुनिंदा कर्मचारियों को ही प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया गया, जबकि यूनियन ने सभी परियोजनाओं के कर्मचारियों को समान प्रोत्साहन देने की मांग की थी। इसके अलावा 30 सितंबर 2025 को हुए समझौते के अनुसार कार्य के आधार पर पद एवं वेतन निर्धारण का निर्णय भी अब तक लागू नहीं किया गया।
तिलक राज ने कहा कि वेलफेयर कार्यालय का पिछले नौ महीनों से किराया नहीं दिया गया है और कार्यालय के लिए आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध नहीं करवाई गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के साथ लगातार शोषण और भेदभाव किया जा रहा है तथा उनके वैध अधिकारों की अनदेखी की जा रही है।
धरने को संबोधित करते हुए सीटू जिला अध्यक्ष कुलदीप डोगरा ने कहा कि लंबे समय से कार्यरत संविदा कर्मचारियों के साथ न्याय नहीं हो रहा है। उन्होंने परियोजना प्रबंधन से एएलसी कार्यालय में हुए समझौतों, कार्य के आधार पर पद एवं वेतन निर्धारण तथा मार्च 2026 के मांग-पत्र पर तत्काल वार्ता कर सभी लंबित मांगों का समाधान करने की मांग की।
यूनियन ने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते प्रबंधन मजदूरों की न्यायसंगत मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं करता और सकारात्मक वार्ता शुरू नहीं होती, तो ट्रेड यूनियन के तहत आगे की वैधानिक एवं लोकतांत्रिक गतिविधियां शुरू की जाएंगी। ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाले किसी भी औद्योगिक विवाद की जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
