एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
हिमाचल प्रदेश में भारत की जनगणना 2027 का पहला चरण 16 जून 2026 से 15 जुलाई 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इस दौरान राज्यभर में मकान सूचीकरण (House Listing) और मकानों की गणना का कार्य किया जाएगा। जनगणना निदेशालय ने इसकी आधिकारिक जानकारी जारी की है। निदेशालय के अनुसार, जनगणना देश में हर दस वर्ष बाद आयोजित की जाती है और यह जनसंख्या, परिवारों, आवासीय स्थिति, मूलभूत सुविधाओं तथा सामाजिक-आर्थिक स्थिति से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े उपलब्ध कराती है। भारत में जनगणना की शुरुआत वर्ष 1872 से मानी जाती है।
33 सवालों के जरिए जुटाई जाएगी जानकारी
जनगणना के प्रथम चरण में प्रदेश की प्रत्येक आवासीय इकाई और परिवार से संबंधित विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। इसके लिए कुल 33 प्रश्न निर्धारित किए गए हैं, जिनमें आवासीय स्थिति, मूलभूत सुविधाएं, परिसंपत्तियां तथा मोबाइल नंबर जैसी जानकारियां शामिल हैं। इस बार नागरिकों को स्व-गणना (Self Enumeration) की सुविधा भी दी गई है। लोग 1 जून से 15 जून 2026 तक se.census.gov.in पोर्टल पर स्वयं अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इससे लोगों को सुविधाजनक तरीके से डेटा भरने का अवसर मिलेगा। जनगणना 2027 का पहला चरण पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संचालित किया जाएगा। इसके लिए विशेष रूप से विकसित HLO (House Listing Operation) मोबाइल ऐप का उपयोग किया जाएगा। इससे रियल टाइम डेटा अपलोड, बेहतर निगरानी और त्रुटियों में कमी सुनिश्चित होगी।
गोपनीय रहेगी सभी जानकारी
जनगणना कार्य के सफल संचालन के लिए हिमाचल प्रदेश में लगभग 20,630 गणनाकारों और पर्यवेक्षकों की तैनाती की जाएगी। इनके प्रशिक्षण के लिए मास्टर ट्रेनर और फील्ड ट्रेनर कार्यक्रम पहले ही पूरे किए जा चुके हैं। गणनाकारों एवं पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण 1 जून से 12 जून 2026 तक आयोजित होगा। जनगणना निदेशालय ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे गणनाकारों को सही और पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराएं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान प्राप्त सभी सूचनाएं जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत पूरी तरह गोपनीय रखी जाएंगी और केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए ही उपयोग होंगी। जनगणना 2027 से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल, बिजली, आवास और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी योजनाओं के निर्माण तथा संसाधनों के बेहतर आवंटन में किया जाएगा।
