एआरबी टाइम्स ब्यूरो | रामपुर बुशहर
परम पूज्य सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज एवं आदरणीय राजपिता रमित की असीम कृपा से सोमवार को संत निरंकारी मिशन के खनेरी स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन में ज़ोन स्तरीय संत निरंकारी बाल समागम का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता चंडीगढ़ से पधारे एडवोकेट जगतार सिंह ने की। उनके प्रेरणादायक विचारों ने उपस्थित साध संगत और बाल संतों को आध्यात्मिक मूल्यों के प्रति जागरूक एवं प्रेरित किया।
समागम में शिमला ज़ोन की विभिन्न शाखाओं से आए बाल संतों ने गीत, विचार और स्किट के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। उनकी प्रस्तुतियों ने न केवल उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया, बल्कि आध्यात्मिक एवं नैतिक मूल्यों का सशक्त संदेश भी दिया।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि बच्चे कच्ची मिट्टी के समान होते हैं, जिन्हें जैसे संस्कार और संगति मिलती है, उनका व्यक्तित्व भी उसी अनुरूप विकसित होता है। जिस प्रकार कच्ची मिट्टी को आकार देकर सुंदर आकृतियां बनाई जाती हैं, उसी प्रकार बाल्यावस्था में दिए गए संस्कार बच्चों के जीवन की दिशा और दशा तय करते हैं। इसी उद्देश्य से संत निरंकारी मिशन बच्चों को सत्संग एवं आध्यात्मिक वातावरण से जोड़ने पर विशेष बल देता है, ताकि उनके भीतर प्रेम, नम्रता, अनुशासन, सत्यनिष्ठा, शिष्टाचार, सहनशीलता और सेवा भावना जैसे गुण विकसित हो सकें।
अपने संबोधन में प्रचारक महात्मा ने कहा कि जिस प्रकार भौतिक शिक्षा के लिए बच्चों को विद्यालयों और महाविद्यालयों में भेजा जाता है, उसी प्रकार आध्यात्मिक शिक्षा एवं ईश्वर ज्ञान की प्राप्ति के लिए सतगुरु का मार्गदर्शन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों को बचपन से ही सत्संग और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ा जाए, तो वे मिशन की शिक्षाओं को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण और देश के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
