एआरबी टाइम्स ब्यूरो | रिकांगपिओ
महादेव के भक्तों के लिए एक बेहद अच्छी खबर है। देश एवं प्रदेश की सबसे दुर्गम और पवित्र तीर्थ यात्राओं में से एक किन्नौर कैलाश यात्रा (Kinnaur Kailash Yatra) की आधिकारिक तारीखों का एलान हो गया है। समुद्रतल से 19,500 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित इस पावन धाम की यात्रा इस साल 1 जुलाई से शुरू होकर 30 जुलाई तक चलेगी। बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में शुक्रवार को आयोजित बैठक में यात्रा की तिथि तय की गई।
इस बार प्रशासन ने पर्यावरण संतुलन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए कड़े नियम लागू किए हैं। यात्रा पर जाने वाले सभी श्रद्धालुओं का पोवारी बेस कैंप में पंजीकरण (Registration) और कड़ा मेडिकल फिटनेस टेस्ट होगा। अनफिट पाए जाने पर आगे जाने की अनुमति नहीं मिलेगी। सुरक्षा के लिहाज से एक दिन में केवल 375 भक्तों को ही यात्रा पर जाने की अनुमति दी जाएगी। ट्रेकर्स की सुरक्षा के लिए केवल प्रशासन की ओर से अधिकृत और आईडी कार्ड धारक गाइड ही यात्रा में साथ जा सकेंगे। यात्रा की पवित्रता बनाए रखने के लिए स्थानीय देव सभाएं इस यात्रा की निगरानी करेंगी। पर्यावरण को साफ रखने के लिए विशेष एसओपी लागू होगी। किन्नौर कैलाश यात्रा केवल शारीरिक क्षमता की नहीं, बल्कि अटूट श्रद्धा और विश्वास की परीक्षा है।
रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा : बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि यह यात्रा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के साधन लाती है और पर्यटन को बढ़ावा देती है, इसलिए जनहित में इसे सुचारू रूप से चलाने का निर्णय लिया गया है।
किन्नौर कैलाश यात्रा का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में किन्नौर कैलाश का स्थान बेहद विशेष है। इसे भगवान शिव का शीतकालीन निवास स्थान माना जाता है। इस यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थित 79 फीट ऊंचा गगनचुंबी शिवलिंग है। यह शिवलिंग प्रकृति का एक अद्भुत चमत्कार है, जो दिन के अलग-अलग प्रहरों में अपना रंग बदलता है। सुबह के समय इसका रंग कुछ और, दोपहर में यह सुनहरा और शाम ढलते ही यह पूरी तरह बदल जाता है। इस अलौकिक चमत्कार को देखने के लिए देश-विदेश से शिवभक्त खिंचे चले आते हैं।
