एआरबी टाइम्स ब्यूरो | सोलन
हिमाचल प्रदेश में निर्मित दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की मई 2026 की ड्रग अलर्ट रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में बनी 43 दवाओं के नमूने गुणवत्ता परीक्षण में फेल पाए गए हैं। देशभर में कुल 157 दवाओं के नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिनमें हिमाचल प्रदेश की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। राज्य दवा नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने कहा कि गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए बैचों को बाजार से वापस मंगाया जाएगा। साथ ही संबंधित कंपनियों के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सोलन, सिरमौर और ऊना की कंपनियां जांच के दायरे में
रिपोर्ट के मुताबिक, गुणवत्ता जांच में फेल हुई दवाओं का उत्पादन करने वाली कंपनियों में सोलन जिले की 30, सिरमौर की 11 और ऊना की दो कंपनियां शामिल हैं। राज्य दवा नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने बताया कि संबंधित कंपनियों के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही प्रभावित बैचों को बाजार से वापस मंगाने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।सीडीएससीओ की रिपोर्ट के अनुसार, कालाअंब स्थित केसपिन कंपनी द्वारा निर्मित विटामिन-ई दवा के लगातार तीन नमूने गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए हैं। बद्दी और कालाअंब स्थित कई अन्य दवा कंपनियों की दवाएं भी निर्धारित मानकों पर खरी नहीं उतर सकीं।
ये प्रमुख दवाएं गुणवत्ता जांच में फेल
- मार्क लैब (बद्दी) की किडनी रोग संबंधी दवा
- अल्ट्रा ड्रग की बुखार की दवा
- जेएमएम फॉर्म्युलेशन की संक्रमणरोधी दवा
- मर्टिन एंड ब्राउन की एसिडिटी की दवा
- विंग्स कंपनी की कोलेस्ट्रॉल की दवा
- स्पेन फॉर्म्युलेशन की मिर्गी की दवा
- लीफोर्ड हेल्थकेयर की कब्ज की दवा
- क्रेस्ट लाइफ साइंस की सूखी खांसी की दवा
- सेपनिक्स लाइफ साइंस की जोड़ों के दर्द की दवा
- एनडीबी कंपनी की एलर्जी की दवा
- एस्पो फार्मा की खांसी की दवा
- मार्ग लैब की आयरन की कमी संबंधी दवा
कैंसर, मधुमेह और अस्थमा की दवाएं भी मानकों पर खरी नहीं उतरीं
रिपोर्ट में विंग्स बायोटेक की कैंसर संबंधी दवा, वोजमेड फार्मा की मधुमेह की दवा, एक्सनोन की अस्थमा की दवा, मोयोसा फार्मा की मसूड़ों की बीमारी की दवा, स्विस गार्नियर की ब्लड शुगर की दवा और आईबीएन हर्बल की बुखार की दवा के नमूनों के भी गुणवत्ता परीक्षण में फेल होने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा पलेना रेमिडीज की एलर्जी की दवा, ओरोपिन कंपनी की बैक्टीरियल संक्रमण की दवा, निक्सी लेबोरेटरी की विटामिन-ई दवा, हिल्लर लैब की बुखार की दवा और मार्क लेबोरेटरी की उल्टी रोकने वाली दवा के नमूने भी निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे।
