एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
HP High Court News : हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सहकारी बैंक के कर्मचारियों के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी बैंक कर्मचारी को उसकी नियमित नियुक्ति के बाद चार साल तक पदोन्नति नहीं मिलती है, तो वह नई एश्योर्ड कॅरियर प्रोग्रेशन स्कीम (ACPS) के तहत अगले ग्रेड पे का लाभ पाने का हकदार होगा। हाईकोर्ट के न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की एकल पीठ ने बैंक प्रबंधन को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि वे याचिकाकर्ताओं को उनकी 4 वर्ष की सेवा पूरी होने की तिथि से ही एसीपीएस (ACPS Benefit) का लाभ प्रदान करना सुनिश्चित करें।
एरियर भुगतान को लेकर कोर्ट की सख्त समय-सीमा
अदालत ने याचिका दायर करने में हुई देरी को संज्ञान में लेते हुए वित्तीय एरियर के भुगतान को लेकर कुछ सीमाएं भी तय की हैं( कर्मचारियों को याचिका दायर करने की तिथि से केवल तीन वर्ष पूर्व तक की अवधि का ही एरियर (Arrears) दिया जाएगा। बैंक प्रबंधन को इस एरियर का भुगतान आदेश जारी होने के तीन महीने के भीतर करना होगा। यदि बैंक तय समय-सीमा के भीतर भुगतान करने में विफल रहता है, तो उसे बकाया राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी चुकाना होगा।
हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी: “वेतन या एसीपीएस लाभ से वंचित रखना एक निरंतर होने वाली गलती (Continuing Wrong) है। इससे कर्मचारियों को हर महीने आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, इसलिए इसे केवल समय-सीमा (Limitation) के तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता।”
क्या था पूरा मामला?
यह ऐतिहासिक आदेश अजय कुमार एवं अन्य कर्मचारियों द्वारा दायर की गई दो अलग-अलग याचिकाओं का निपटारा करते हुए आया है। मामले का पूरा घटनाक्रम इस प्रकार है। याचिकाकर्ताओं को सितंबर और अक्टूबर 2017 में हिमाचल राज्य सहकारी बैंक में जूनियर क्लर्क के पद पर नियुक्त किया गया था। वर्ष 2021 में उन्होंने बिना किसी पदोन्नति के अपनी चार वर्ष की नियमित सेवा पूरी कर ली थी। इसके बाद वर्ष 2023 में उन्हें एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट के पद पर प्रमोट किया गया। कर्मचारियों का तर्क था कि वर्ष 2016 में नियुक्त हुए अन्य समकक्ष कर्मियों को 4 साल पूरे होते ही एसीपीएस का लाभ दे दिया गया था, लेकिन उनके मामले में इस वित्तीय लाभ को रोक दिया गया, जो पूरी तरह से भेदभावपूर्ण और मनमाना था। हाईकोर्ट ने बैंक की सभी आपत्तियों को दरकिनार करते हुए कर्मचारियों के हक में फैसला सुनाया।
