एआरबी टाइम्स ब्यूरो, धर्मशाला | राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस ब्यूरो) हिमाचल प्रदेश ने कांगड़ा जिले के देहरा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक होशियार सिंह के विरुद्ध एक बड़ा कदम उठाया है। विजिलेंस ब्यूरो ने सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और धोखाधड़ी के संबंध में प्राप्त एक गंभीर शिकायत पर प्रारंभिक जांच के बाद उनके खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। यह पूरी कार्रवाई पूर्व विधायक की ही एक निजी कंपनी के कर्मचारियों की ओर से दी शिकायत के आधार पर की गई है।
जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
विजिलेंस ब्यूरो की ओर से की गई प्रारंभिक जांच के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों, संबंधित लाभार्थियों के बैंक रिकॉर्ड, सरकारी कागजातों और शिकायतकर्ताओं सहित अन्य व्यक्तियों के बयानों का गहन परीक्षण किया गया। इस जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सामने आया है कि वर्ष 2023 और 2024 के दौरान विधायक ऐच्छिक निधि के तहत कुछ गरीब व जरूरतमंद व्यक्तियों के नाम पर वित्तीय सहायता स्वीकृत और जारी की गई थी। हालांकि, शिकायतकर्ताओं और अन्य संबंधित व्यक्तियों ने ऐसी किसी भी सहायता के लिए कभी कोई आवेदन ही नहीं किया था। जांच के दौरान कथित लाभार्थियों ने बयान दिया है कि जब यह सहायता राशि उनके बैंक खातों में आई, तो पूर्व विधायक के निर्देशानुसार उन्होंने उस राशि को नकद निकाला और पूर्व विधायक या उनके करीबियों को सौंप दिया।
जिनके नाम राशि स्वीकृत हुई, उन्हें नहीं मिला लाभ
सत्यापन के दौरान जुटाए गए दस्तावेजी साक्ष्यों और बैंक ट्रांजेक्शन के रिकॉर्ड से यह साफ तौर पर परिलक्षित हुआ है कि सरकारी धन का उपयोग उसके निर्धारित उद्देश्य के विपरीत किया गया। जिन लाभार्थियों के नाम पर राशि स्वीकृत हुई थी, उन्हें इसका वास्तविक लाभ मिला ही नहीं। इन पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया आपराधिक न्यासभंग और छल के अपराध प्रमाणित होने पर भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 की धारा 409 और 420 के तहत विजिलेंस ब्यूरो के थाना धर्मशाला में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
अन्य लोगों की भूमिका की भी होगी जांच
विजिलेंस ब्यूरो ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान जो भी नए साक्ष्य सामने आएंगे, उनके आधार पर इस पूरे मामले में शामिल अन्य अधिकारियों, कर्मचारियों या सहयोगियों की भूमिका का भी परीक्षण किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम या अन्य प्रासंगिक विधिक प्रावधानों के तहत अतिरिक्त धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं। जांच पूरी तरह से निष्पक्ष, पारदर्शी और साक्ष्य-आधारित होगी। किसी भी व्यक्ति की जवाबदेही केवल कानून और सबूतों के आधार पर ही तय की जाएगी।
भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’
राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने अपने आधिकारिक बयान में पुनः दोहराया है कि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार अथवा जनता के विश्वास को ठेस पहुंचाने वाले किसी भी अपराध के प्रति ‘शून्य सहिष्णुता’ (जीरो टॉलरेंस) की नीति अपनाई गई है। कानून के समक्ष सभी व्यक्ति समान हैं और मामले की निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करना ब्यूरो की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
