एआरबी टाइम्स ब्यूरो, सोलन | केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की ओर से जारी जून के ड्रग अलर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। हिमाचल प्रदेश में निर्मित 45 दवाओं समेत देशभर की कुल 159 दवाओं के सैंपल फेल पाए गए हैं। इनमें एलर्जी, बुखार, हार्ट, बीपी, इंफेक्शन, अल्सर और बच्चों के सिरप (पैरासिटामोल पीडियाट्रिक) जैसी रोजाना इस्तेमाल होने वाली अहम दवाएं शामिल हैं। जांच के दौरान अधिकतर दवाएं डिसॉल्यूशन, कंटेंट, एस्से, स्टेरिलिटी, पीएच (pH) और सक्रिय औषधीय तत्व की निर्धारित मात्रा जैसे महत्वपूर्ण गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं।
बच्चों की सिरप और एंटीबायोटिक्स के सैंपल भी फेल
झाड़माजरी स्थित एक फार्मा इकाई की एमोक्सिसिलिन और पोटेशियम क्लैवुलनेट टैबलेट एस्से परीक्षण में असफल रही, जबकि सेफिक्सिम डिस्पर्सिबल टैबलेट भी गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरी। सबसे चिंताजनक बात यह है कि पैरासिटामोल पीडियाट्रिक सस्पेंशन (बच्चों की बुखार की दवा) के दो बैच भी अधोमानक पाए गए हैं, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसके अलावा खांसी और पाचन संबंधी मोंटेलुकास्ट-लेवोसेटिरिजिन तथा एम्ब्रोक्सोल सिरप भी कंटेंट टेस्ट में फेल हुए हैं।
इन औद्योगिक क्षेत्रों की कंपनियों पर गिरी गाज
सोलन जिला: बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, झाड़माजरी, दवनी, गुल्लरवाला, परवाणू और सोलन।
सिरमौर जिला: कालाअंब और पांवटा साहिब।
कांगड़ा जिला: कांगड़ा स्थित फार्मा इकाइयां।
ड्रग विभाग का कड़ा रुख: वापस मंगाया जा रहा है स्टॉक
“ड्रग अलर्ट में जिन कंपनियों की दवाएं मानकों पर खरी नहीं उतरी हैं, उनके खिलाफ ‘ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट’ के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है। संबंधित कंपनियों को बाजार से इन दवाओं के पूरे स्टॉक को तुरंत वापस (Recall) मंगाने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग अपने स्तर पर भी दोबारा सैंपलिंग कर जांच करेगा।”
— डॉ. मनीष कपूर, राज्य ड्रग नियंत्रक
