एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला | अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU Shimla) इकाई ने विश्वविद्यालय परिसर में सैकड़ों छात्रों के साथ विशाल आक्रोश प्रदर्शन और धरना दिया। एबीवीपी ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए फीस वृद्धि वापस लेने और छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग उठाई। मांगे पूरी न होने तक विद्यार्थी परिषद ने विश्वविद्यालय परिसर में क्रमिक भूख हड़ताल (Hunger Strike) शुरू कर दी है।

‘शिक्षा व्यापार नहीं, फीस वृद्धि गरीब छात्रों पर सीधा प्रहार’
इकाई अध्यक्ष अक्षय ठाकुर ने जारी बयान में कहा कि देवभूमि के आम और ग्रामीण परिवारों के बच्चों की उम्मीदों का केंद्र रहा यह विश्वविद्यालय आज व्यावसायिकता की अंधी दौड़ में शामिल होता दिख रहा है।
आर्थिक बोझ: हिमाचल की अधिकांश आबादी ग्रामीण क्षेत्रों से आती है, जहां किसान और बागवान अपनी गाढ़ी कमाई जोड़कर बच्चों को शिमला पढ़ने भेजते हैं।
मूलभूत सुविधाओं का अभाव: एबीवीपी ने सवाल उठाया कि बिना हॉस्टल, आधुनिक लाइब्रेरी और पर्याप्त बस सुविधाएं दिए बिना फीस में इतनी बढ़ोतरी का पैसा किसकी जेब में जा रहा है?
मौलिक अधिकारों का हनन: रहने और खाने के खर्चों से जूझ रहे गरीब व मध्यमवर्गीय छात्रों पर फीस का यह अतिरिक्त बोझ उनकी उच्च शिक्षा के रास्ते में एक बड़ी दीवार बन गया है।
छात्र संघ चुनाव (SCA) की बहाली क्यों जरूरी?
विद्यार्थी परिषद ने मांग की है कि विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव (SCA Elections) तुरंत बहाल किए जाएं।
“जब-जब विश्वविद्यालय में कार्यकारी परिषद (EC) की बैठक होती है, उसमें छात्र हितों की आवाज उठाने वाला कोई भी प्रतिनिधि मौजूद नहीं होता। जब तक चुनाव बहाल नहीं होंगे, प्रशासन इसी तरह छात्र-विरोधी नीतियां बनाता रहेगा।” — अक्षय ठाकुर, इकाई अध्यक्ष (ABVP HPU)
‘जान-माल के खतरे की जिम्मेदारी वीसी और सरकार की होगी’

विद्यार्थी परिषद ने स्पष्ट किया कि जब तक फीस वृद्धि का फैसला वापस नहीं लिया जाता, तब तक यह क्रमिक भूख हड़ताल और आंदोलन जारी रहेगा। एबीवीपी ने चेतावनी दी है कि यदि भूख हड़ताल के दौरान किसी भी छात्र के स्वास्थ्य या जान-माल को नुकसान पहुँचता है, तो उसका पूरा खामियाजा विश्वविद्यालय के कुलपति (VC), मुख्यमंत्री और प्रदेश के शिक्षा मंत्री को भुगतना पड़ेगा।
