एआरबी टाइम्स ब्यूरो, बिलासपुर
राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने बिलासपुर स्थित आर्ट एंड कल्चर ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में ‘एक से श्रेष्ठ’ पहल के लगभग पांच वर्ष पूरे होने और 650 शिक्षा केंद्रों तक पहुंचने पर एक्ट टू ट्रांसफार्म फाउंडेशन को बधाई दी। इस पहल से करीब 12,000 बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं। राज्यपाल ने कहा कि 650 केंद्र महज एक संख्या नहीं हैं, बल्कि ऐसे केंद्र हैं जहां बच्चों तक ज्ञान का प्रकाश पहुंच रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से बच्चों को बेहतर भविष्य के सपने देखने और उन्हें साकार करने का अवसर मिल रहा है।
शिक्षा बदलाव का सबसे प्रभावी माध्यम : राज्यपाल
राज्यपाल ने कहा कि समावेशी, कुशल और भविष्य के लिए तैयार भारत के निर्माण में शिक्षा की केंद्रीय भूमिका है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, पीएम श्री, निपुण भारत, डिजिटल इंडिया और कौशल विकास जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका उद्देश्य बच्चों और युवाओं के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध करवाना है। ‘एक से श्रेष्ठ’ जैसे जमीनी स्तर के प्रयास शिक्षा और सामाजिक सहभागिता को समुदायों के करीब लाकर इस व्यापक प्रयास को मजबूती देते हैं। हर बच्चे को, चाहे वह शहर में रहता हो या दूरदराज गांव में, सीखने, आगे बढ़ने और अपने सपनों को पूरा करने के समान अवसर मिलने चाहिए। शिक्षा केवल स्कूल तक पहुंच सुनिश्चित करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बच्चों को आवश्यक संसाधन, मार्गदर्शन और आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी मिलना चाहिए।
शिक्षकों को बांटे लैपटॉप, बच्चों को मिली शिक्षण सामग्री

कार्यक्रम में राज्यपाल ने शिक्षकों को लैपटॉप वितरित किए। उन्होंने शिक्षकों से तकनीक का उपयोग केवल शिक्षण सहायता के रूप में नहीं, बल्कि बच्चों की व्यक्तिगत सीखने की जरूरतों को समझने और उनका समाधान करने के माध्यम के रूप में करने का आग्रह किया। इस दौरान बच्चों को स्टडी टेबल, स्कूल बैग, नोटबुक, स्टेशनरी, जूते और ट्रैकसूट भी वितरित किए गए। राज्यपाल ने फाउंडेशन की ओर से बच्चों को निशुल्क शिक्षा, शिक्षण सामग्री और अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध करवाने की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसी सहायता बच्चों को यह संदेश देती है कि उनकी शिक्षा और सपने महत्वपूर्ण हैं तथा समाज को उनकी क्षमताओं पर विश्वास है।
‘एक से श्रेष्ठ’ पहल से 692 रोजगार के अवसर
राज्यपाल ने कहा कि ‘एक से श्रेष्ठ’ पहल के माध्यम से 692 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। इनमें करीब 90 प्रतिशत अवसर महिलाओं को मिले हैं। लगभग 60 प्रतिशत लोगों को इस कार्यक्रम के माध्यम से पहली बार रोजगार का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि निशुल्क शिक्षा, किताबें, स्टेशनरी, बैग, लैपटॉप और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध करवाने से हजारों परिवारों के शैक्षणिक खर्च को कम करने में मदद मिली है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 12,000 से अधिक परिवारों ने सामूहिक रूप से 5.40 करोड़ रुपये से अधिक की बचत की है। पहल की वास्तविक उपलब्धि किसी बच्चे के बढ़े आत्मविश्वास, अभिभावकों की कम हुई चिंता, शिक्षक की गरिमा और परिवार में बेहतर भविष्य की उम्मीद में दिखाई देती है।
