एआरबी टाइम्स ब्यूरो | चंबा
नियति के क्रूर खेल की इससे दर्दनाक तस्वीर और क्या होगी कि जिस आंगन में बेटी की सगाई की खुशियां गूंजनी थीं, आज वहां सिर्फ सिसकियां और गम का माहौल है। 20 वर्षीय अनीता कुमारी अपने जीवन के एक नए और खूबसूरत सफर की दहलीज पर खड़ी थी। माता-पिता की आंखों में उसकी खुशहाल जिंदगी के सपने थे और घर में उत्सव जैसा माहौल था। लेकिन एक सड़क हादसे ने सगाई से कुछ घंटे पहले अनीता को हमेशा के लिए अपनों से छीन लिया। पल भर में हंसी-खुशी से भरा घर आंसुओं के सैलाब में डूब गया।
चंबा जिले के मेहल गांव निवासी धर्म सिंह की बेटी अनीता केवल परिवार की लाडली ही नहीं, बल्कि उनके सपनों और उम्मीदों का आधार भी थी। पढ़ाई में होनहार अनीता ने जमा दो की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी थी। उसका सपना अपने पैरों पर खड़ा होकर माता-पिता का सहारा बनने का था, जिन्होंने मेहनत-मजदूरी और खेती-बाड़ी करके उसे पढ़ाया-लिखाया था। बुधवार को अनीता ने चंबा में जेबीटी प्रवेश परीक्षा दी थी। परीक्षा के बाद वह अपने रिश्तेदारों के साथ एक मुंडन संस्कार में शामिल होने पहुंची। हंसी-खुशी का माहौल था। कोई नहीं जानता था कि यह साथ बिताए गए वे आखिरी पल हैं।
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घर लौटते वक्त मौत ने रास्ता रोक लिया
बुधवार देर रात मुंडन संस्कार से अनीता अपने ताऊ चुनी लाल, देवी सिंह, मोती राम, ताई बबली देवी और कुंता देवी के साथ वाहन में सवार होकर घर लौट रही थी। गाड़ी में वीरवार को होने वाली सगाई की तैयारियों और आने वाले शुभ दिन की बातें हो रही थीं। लेकिन रास्ते में एक भयानक हादसे ने सब कुछ खत्म कर दिया। एक पल में खुशियों से भरा परिवार उजड़ गया और अनीता समेत एक ही परिवार के छह लोगों की जिंदगी हमेशा के लिए थम गई। हादसे ने ऐसा जख्म दिया है, जो शायद कभी नहीं भर पाएगा।
जिस हाथों पर सजनी थी मेहंदी, वहां ओढ़ा दिया गया कफन
वीरवार को जिस बेटी की हथेलियों पर सगाई की मेहंदी रचनी थी, उसी की पार्थिव देह सफेद कफन में लिपटी घर पहुंची। बेटी की अर्थी देखते ही मां का कलेजा फट पड़ा। वह बार-बार अपनी लाडली का चेहरा देखकर बेसुध हो रही थी और बिलखते हुए यही कह रही थी, बेटा, एक बार आंखें खोल ले… आज तो तेरी सगाई है। पिता धर्म सिंह की आंखें पथरा चुकी थीं। जिन हाथों से उन्होंने बेटी के भविष्य के सपने संवारे थे, उन्हीं हाथों से अब उसकी अंतिम विदाई की तैयारी करनी पड़ रही थी। परिजनों की सिसकियों ने गांव को गमगीन कर दिया। जिस घर में खुशियों की गूंज सुनाई देने वाली थी, वहां अब गम, आंसू और लाडली को खोने का असहनीय दर्द बाकी रह गया है।
