एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग में असिस्टेंट स्टाफ नर्स (Assistant Staff Nurse) के 900 पदों पर की जा रही भर्ती प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई तक न तो कोई नया नियुक्ति पत्र जारी किया जाए और न ही चयनित अभ्यर्थियों को ज्वाइनिंग की अनुमति दी जाए।
नियमों में संशोधन किए बिना बनाई गई नई नीति
अदालत ने पाया कि राज्य सरकार ने भर्ती एवं सेवा नियमों में संशोधन किए बिना ही 6 नवंबर 2025 को नई नीति अधिसूचित कर असिस्टेंट स्टाफ नर्स नाम से नया कैडर तैयार कर दिया था। इसके तहत 900 पद भरने की मंजूरी भी दी गई, जबकि इन पदों के लिए न तो भर्ती नियमों में बदलाव किया गया और न ही कोई निर्धारित वेतनमान तय किया गया। हालांकि, सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ने दलील दी कि नियुक्तियां सरकारी नीति के तहत की जा रही हैं, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। खंडपीठ ने राज्य सरकार को 7 जुलाई तक हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। इसमें पिछले तीन वर्षों में सभी विभागों में आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या और नियमित रिक्त पदों का पूरा ब्योरा देने को कहा गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि बिना नियमों में संशोधन किए की गई असिस्टेंट स्टाफ नर्स भर्ती कानूनी रूप से कैसे वैध है।
1,535 नियमित पद खाली, फिर भी आउटसोर्स भर्ती
सुनवाई के दौरान सामने आया कि राज्य में स्वास्थ्य विभाग में नर्सों के 1535 नियमित पद रिक्त हैं। कोर्ट ने हैरानी जताई कि इतनी बड़ी संख्या में नियमित पद रिक्त होने के बावजूद सरकार आउटसोर्स पर भर्ती कर रही है। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्वास्थ्य सचिव के जापान दौरे पर भी हैरानी जताई। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब राज्य आर्थिक संकट का सामना कर रहा है, तब वरिष्ठ अधिकारियों के लंबे विदेशी दौरों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार की ओर से दाखिल हलफनामे में खुलासा हुआ है कि राज्य में आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2023 में जहां यह संख्या 17,114 थी, वहीं अब बढ़कर 26,724 हो गई है।
