एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुबंध आधार पर मेडिकल अफसरों (एमओ) की भर्ती से जुड़े मामलों की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को एक महीने के भीतर सुप्रीम कोर्ट में उचित आवेदन याचिका दायर करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि सरकार को यह जानकारी थी कि हाईकोर्ट में कई अन्य पात्र डॉक्टरों की याचिकाएं लंबित हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में अपील की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को इन मामलों की जानकारी सर्वोच्च न्यायालय के संज्ञान में लानी चाहिए थी।
न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह एक महीने के भीतर सुप्रीम कोर्ट में आवेदन याचिका दायर कर पूरी स्थिति स्पष्ट करे। साथ ही, याचिकाकर्ता डॉक्टरों को भी राहत के लिए स्वयं सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की स्वतंत्रता दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश सभी अदालतों पर बाध्यकारी
हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत सुप्रीम कोर्ट का फैसला सभी अदालतों पर बाध्यकारी है। सुप्रीम कोर्ट ने 12 मई 2026 के अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि राहत का लाभ केवल उन्हीं उम्मीदवारों तक सीमित रहेगा, जो सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मामले में पक्षकार थे। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में हाईकोर्ट सीधे उन डॉक्टरों को नियुक्ति देने का आदेश जारी करता है तो यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के विपरीत होगा। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी माना कि वर्तमान याचिकाकर्ता मूकदर्शक नहीं थे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले ही हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया था और उनकी याचिकाएं लंबित थीं। इसलिए केवल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर उनकी याचिकाओं को सीधे खारिज करना उचित नहीं होगा।
81 मेडिकल अफसर पदों की भर्ती से जुड़ा है मामला
मामला नवंबर 2021 में शुरू हुई मेडिकल अफसर भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल अफसरों के 81 पदों के लिए वॉक-इन इंटरव्यू की सूचना जारी की थी। 7 दिसंबर 2021 को हुए इंटरव्यू के बाद 76 पात्र उम्मीदवारों की मेरिट सूची तैयार की गई।इसके बाद 1 फरवरी 2022 को सरकार ने 76 में से 43 उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र जारी किए, जबकि 33 पात्र उम्मीदवार नियुक्ति से बाहर रह गए। इसी दौरान सरकार ने बाद के महीनों में मेडिकल अफसरों के सैकड़ों नए पदों के लिए भी विज्ञापन जारी किए।
हाईकोर्ट ने 2022 में नियुक्ति का दिया था आदेश
डॉ. ऐश्वर्या ठाकुर और अन्य की याचिका पर 17 नवंबर 2022 को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सरकार के फैसले को मनमाना माना था। अदालत ने शेष पात्र उम्मीदवारों को नियुक्ति देने का आदेश दिया था। राज्य सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने 12 मई 2026 को फैसला सुनाते हुए सरकार के निर्णय को गलत माना, लेकिन राहत का दायरा सीमित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राहत का लाभ केवल उन्हीं उम्मीदवारों को मिलेगा, जो सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर अपील में पक्षकार थे।
सरकार को पहले ही सुप्रीम कोर्ट को बताना चाहिए था : हाईकोर्ट
मौजूदा सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसे सुप्रीम कोर्ट को हाईकोर्ट में लंबित समान मामलों की जानकारी देनी चाहिए थी। अदालत ने राज्य सरकार को अब सुप्रीम कोर्ट में आवेदन याचिका दाखिल कर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। वहीं, याचिकाकर्ता डॉक्टरों के लिए भी सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का रास्ता खुला रखा गया है।
