ननखड़ी कॉलेज को बंद करने के प्रदेश सरकार के फैसले का स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने कड़ा विरोध किया है। एसएफआई ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण, जनविरोधी और विद्यार्थी विरोधी निर्णय बताते हुए कहा कि इससे सैकड़ों छात्र-छात्राओं की उच्च शिक्षा प्रभावित होगी।
एसएफआई जिला शिमला के उपाध्यक्ष राहुल विद्यार्थी ने कहा कि ननखड़ी और आसपास के दूरदराज़ ग्रामीण क्षेत्रों के अनेक विद्यार्थी अपनी उच्च शिक्षा के लिए इस कॉलेज पर निर्भर हैं। आर्थिक एवं पारिवारिक परिस्थितियों के कारण अधिकांश छात्र बड़े शहरों में जाकर शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में ननखड़ी कॉलेज उनके लिए केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य की उम्मीद और सपनों का आधार है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक माता-पिता का सपना होता है कि उनका बच्चा शिक्षा प्राप्त कर जीवन में आगे बढ़े और समाज में सम्मानजनक स्थान हासिल करे। लेकिन सरकार के इस फैसले ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने का प्रयास कर रहे परिवारों की उम्मीदों को गहरा आघात पहुंचाया है।
राहुल विद्यार्थी ने कहा कि ननखड़ी जैसे पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए प्रतिदिन रामपुर या शिमला जाकर पढ़ाई करना आसान नहीं है। लंबी दूरी, परिवहन की समस्याएं, बढ़ता आर्थिक बोझ और अन्य व्यावहारिक कठिनाइयां विद्यार्थियों की शिक्षा में गंभीर बाधा उत्पन्न करेंगी। इसका सबसे अधिक प्रभाव गरीब, किसान, मजदूर और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों पर पड़ेगा।
एसएफआई का कहना है कि शिक्षा प्रत्येक नागरिक का मूल अधिकार है। ऐसे में किसी क्षेत्र के विद्यार्थियों से उच्च शिक्षा के अवसर छीनना उनके भविष्य के साथ अन्याय है। संगठन ने सरकार से शिक्षा संस्थानों को बंद करने के बजाय उन्हें सुदृढ़ करने और सुविधाएं बढ़ाने की मांग की है।
एसएफआई जिला शिमला ने प्रदेश सरकार से ननखड़ी कॉलेज को बंद करने के फैसले को तुरंत वापस लेने तथा कॉलेज में आवश्यक शैक्षणिक और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया तो विद्यार्थियों, अभिभावकों और स्थानीय जनता को साथ लेकर व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन चलाया जाएगा।
