एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला स्तरीय निगरानी एवं समीक्षा समिति की बैठक शुक्रवार को बचत भवन शिमला में उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में केंद्र और प्रदेश सरकार की विभिन्न महिला एवं बाल कल्याण योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
उपायुक्त ने अधिकारियों और फील्ड स्टाफ को निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के लाभार्थियों से सीधे संवाद स्थापित करें और यह सुनिश्चित करें कि उन्हें सभी पात्र योजनाओं का लाभ समय पर मिले। उन्होंने कहा कि अधिकारी स्वयं फील्ड निरीक्षण करें तथा योजना से लाभान्वित बच्चों का रिकॉर्ड तैयार किया जाए, ताकि यह आकलन किया जा सके कि लाभ मिलने के बाद उनकी वर्तमान स्थिति क्या है।
उन्होंने सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में निर्धारित मानकों के अनुरूप बच्चों को पोषणयुक्त आहार, गुणवत्तापूर्ण सेवाएं और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही बच्चों को दिए जाने वाले पोषण आहार की नियमित जांच पर भी जोर दिया।
जिले में बनेंगे 374 सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र
बैठक में बताया गया कि जिले में 374 सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र स्थापित करने की मंजूरी मिल चुकी है। वर्तमान में 40 आंगनबाड़ी-कम-क्रेच संचालित हैं, जबकि 20 नए क्रेच खोलने की भी स्वीकृति प्राप्त हो गई है। जिले में कुल 2,154 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें से 228 अपने भवनों, 1,076 किराये के भवनों तथा 850 अन्य विभागों के भवनों में चल रहे हैं। इसके अलावा 60 केंद्रों में शौचालय निर्माण के लिए धन स्वीकृत हुआ है, जिनमें से 34 शौचालय बनकर तैयार हो चुके हैं।
विभिन्न योजनाओं की प्रगति
बैठक में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति भी साझा की गई।
- मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत पिछले वर्ष 64 लाभार्थी रहे, जबकि इस वर्ष अब तक 49 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
- मुख्यमंत्री शगुन योजना में पिछले वर्ष 335 लाभार्थी रहे और इस वर्ष 30 आवेदन मिले हैं।
- विधवा पुनर्विवाह योजना के तहत 25 लाभार्थियों को कुल 50 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई।
- महिला स्वरोजगार सहायता योजना के अंतर्गत 94 महिलाओं को 4.70 लाख रुपये वितरित किए गए।
- इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना के तहत 1,813 लाभार्थियों के लिए 2.53 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जबकि अब तक 927 लाभार्थी इसका लाभ उठा चुके हैं।
इसके अलावा इंदिरा गांधी सुख सुरक्षा योजना के तहत बीपीएल परिवार में बेटी के जन्म पर 25 हजार रुपये की एफडी, माता-पिता के लिए दो-दो लाख रुपये का बीमा तथा कक्षा एक से स्नातक तक 450 रुपये से 5,000 रुपये तक छात्रवृत्ति देने का प्रावधान है।
बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त सचिन शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल रांटा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र क्या हैं?
जिला कार्यक्रम अधिकारी ममता पॉल ने बताया कि सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र भारत सरकार के मिशन सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0 के तहत विकसित किए जा रहे आधुनिक केंद्र हैं। इनका उद्देश्य बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को बेहतर पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं और गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराना है।
सक्षम आंगनबाड़ी केंद्रों में उपलब्ध प्रमुख सुविधाएं
- 6 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के लिए पूरक पोषण
- 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए खेल एवं गतिविधि आधारित प्री-स्कूल शिक्षा
- एलईडी स्क्रीन और ऑडियो-वीडियो आधारित स्मार्ट लर्निंग सुविधा
- भारतनेट के माध्यम से इंटरनेट/वाई-फाई (जहां संभव हो)
- सुरक्षित पेयजल और जल शुद्धिकरण व्यवस्था
- स्वच्छ शौचालय एवं हाथ धोने की सुविधा
- पोषण वाटिका के माध्यम से ताजी सब्जियां एवं फल
- नियमित स्वास्थ्य जांच एवं टीकाकरण
- माताओं के लिए पोषण, स्तनपान और स्वच्छता संबंधी परामर्श
- जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य संस्थानों के लिए रेफरल सुविधा
- खाद्यान्न एवं पोषण सामग्री का सुरक्षित भंडारण
- स्थानीय आवश्यकता के अनुसार वर्षा जल संचयन जैसी पर्यावरण अनुकूल सुविधाएं
