एआरबी टाइम्स ब्यूरो, दिल्ली
हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा सांसद प्रोफेसर डॉ. सिकंदर कुमार को राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (NIFTEM) की काउंसिल का सदस्य विधिवत निर्वाचित किया गया है। संसद के उच्च सदन से मिली यह जिम्मेदारी हिमाचल के कृषि, बागवानी, खाद्य प्रसंस्करण और युवा उद्यमिता के क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
राज्यसभा सचिवालय, संसदीय सौध, नई दिल्ली की ओर से 14 अगस्त 2026 को जारी कार्यालय ज्ञापन के अनुसार डॉ. सिकंदर कुमार का निर्वाचन काउंसिल के सदस्य के रूप में हुआ है। इससे पहले केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान के पत्र के संदर्भ में 7 अगस्त 2026 को राज्यसभा में इस संबंध में प्रस्ताव स्वीकृत किया गया था। इसके बाद हुई चुनावी प्रक्रिया में 13 अगस्त 2026 को डॉ. कुमार को काउंसिल का सदस्य निर्वाचित किया गया।
राज्यसभा सचिवालय के उप सचिव अनुराग सैनी की ओर से जारी ज्ञापन में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय को डॉ. सिकंदर कुमार को काउंसिल की भूमिका, जिम्मेदारियों और कार्यों से संबंधित आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने तथा समन्वय के लिए उचित स्तर के अधिकारी की नियुक्ति के निर्देश दिए गए हैं।
हिमाचल के किसानों-बागवानों को लाभ की उम्मीद
डॉ. सिकंदर कुमार के NIFTEM काउंसिल में शामिल होने से हिमाचल प्रदेश के कृषि और बागवानी उत्पादों के मूल्य संवर्धन, खाद्य प्रसंस्करण, कोल्ड-चेन और बाजार से बेहतर जुड़ाव को लेकर नई उम्मीद जगी है। हिमाचल सेब, कीवी, मशरूम, अदरक, लहसुन सहित विभिन्न फल एवं सब्जियों के उत्पादन के लिए देशभर में पहचान रखता है। प्रदेश में उत्पादन के बाद उचित भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन सुविधाओं की कमी के कारण किसानों-बागवानों को कई बार नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में NIFTEM जैसे राष्ट्रीय संस्थान की काउंसिल में हिमाचल का प्रतिनिधित्व होने से प्रदेश की जरूरतों और संभावनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से रखने का अवसर मिलेगा।
उम्मीद है कि डॉ. सिकंदर कुमार अपने अनुभव और सक्रिय भागीदारी के माध्यम से हिमाचल के लिए फूड प्रोसेसिंग तकनीक, आधुनिक पैकेजिंग, वैल्यू एडिशन, कोल्ड-चेन और कृषि आधारित उद्यमिता से जुड़े नए प्रोजेक्ट और अवसर लाने में भूमिका निभा सकेंगे।
ग्रामीण युवाओं के लिए खुल सकते हैं रोजगार के अवसर
NIFTEM का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र खाद्य प्रौद्योगिकी और उद्यमिता को बढ़ावा देना है। ऐसे में हिमाचल के स्थानीय कृषि एवं बागवानी उत्पादों पर आधारित छोटे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, माइक्रो-एंटरप्राइज और स्टार्टअप विकसित करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
इससे विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने, किसानों की उपज का बेहतर मूल्य दिलाने और कृषि उत्पादों को तैयार खाद्य उत्पादों में बदलकर बाजार तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
हमीरपुर से राष्ट्रीय जिम्मेदारी तक
मूल रूप से जिला हमीरपुर के कांगू क्षेत्र के गांव ढगोह से संबंध रखने वाले प्रोफेसर (डॉ.) सिकंदर कुमार प्रतिष्ठित शिक्षाविद और पूर्व कुलपति रहे हैं। राज्यसभा में भी वे विभिन्न जनहित के मुद्दों को उठाते रहे हैं। NIFTEM काउंसिल में उनका निर्वाचन न केवल उनके लिए एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दायित्व है, बल्कि हिमाचल प्रदेश के लिए भी संभावनाओं के नए द्वार खोलने वाला कदम माना जा रहा है। खासकर प्रदेश की बागवानी अर्थव्यवस्था, खाद्य प्रसंस्करण और ग्रामीण युवा उद्यमिता को इससे भविष्य में लाभ मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
अब उम्मीद यह है कि काउंसिल में हिमाचल की आवाज पहुंचने के साथ प्रदेश के फल-सब्जी उत्पादकों, किसानों, बागवानों और युवाओं की जरूरतों को राष्ट्रीय खाद्य प्रसंस्करण नीतियों में अधिक प्रभावी स्थान मिल सकेगा।
