एआरबी टाइम्स ब्यूरो, रामपुर बुशहर
देश के महत्वपूर्ण और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को तकनीकी रूप से और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने राष्ट्रीय इंजीनियर्स दिवस (15 सितंबर 2026) के अवसर पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर के साथ दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों के माध्यम से साइबर सुरक्षा और ड्रोन एवं एंटी-ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में CISF की क्षमताओं को विकसित किया जाएगा।
इन समझौतों के तहत साइबर सुरक्षा में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने के साथ-साथ राजस्थान के बहरोड़ स्थित CISF प्रशिक्षण केंद्र में ड्रोन तकनीक का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा।
साइबर सुरक्षा में छह सप्ताह का आवासीय प्रशिक्षण
IIT कानपुर के C3iHub (IHUB NTIHAC Foundation) के साथ हुए पहले समझौते के तहत तीन वर्ष के फ्रेमवर्क में छह सप्ताह का निःशुल्क आवासीय साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। प्रत्येक बैच में 40 CISF जवानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
यह पहल DGP/IGP सम्मेलन-2024 में प्रधानमंत्री के विजन और केंद्रीय गृह मंत्री के निर्देशों के अनुरूप अर्धसैनिक बलों में विशेष साइबर कमांडो तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
प्रशिक्षण के दौरान एविएशन, पावर और न्यूक्लियर सेक्टर से जुड़े साइबर खतरों, क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल फोरेंसिक, इंसिडेंट रिस्पॉन्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग (AI/ML), डीपफेक, IoT, क्लाउड और ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी (OT) जैसे विषयों पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित क्राइसिस सिमुलेशन भी आयोजित किए जाएंगे।
इस समझौते पर CISF के आईजी (एयरपोर्ट सेक्टर-I) सेंथिल अवुडई कृष्णा राज एस. (IPS) और C3iHub की सीईओ डॉ. तनिमा हाजरा ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर प्रो. सुरेंद्र बसवाना, डॉ. रास द्विवेदी, डॉ. आनंद हांडा और अजय कुमार मिश्रा उपस्थित रहे।
बहरोड़ में बनेगा ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
दूसरे समझौते के तहत CISF के आरटीसी (MPRTC), बहरोड़, राजस्थान में ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक का अत्याधुनिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा। यह समझौता पांच वर्ष के फ्रेमवर्क पर आधारित है।
केंद्र में UAV ऑपरेशंस, ड्रोन फोरेंसिक और मानव रहित प्रणालियों की साइबर सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा संदिग्ध ड्रोन के विश्लेषण, रडार (RF) और माइक्रो-डॉपलर डिटेक्शन, काउंटर-UAS सिस्टम तथा ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ड्रोन ऑपरेशंस को लेकर संयुक्त शोध किया जाएगा।
इस सेंटर में अत्याधुनिक सिमुलेटर्स, फोरेंसिक लैब और अन्य तकनीकी बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा। यह पहल ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया के साथ CISF के हालिया समझौते को भी मजबूती प्रदान करेगी।
समझौते पर CISF (MPRTC बहरोड़) के डीआईजी डॉ. सी. धनंजय नाइक और IIT कानपुर के डीन (R&D) प्रो. जयधरन जी. राव ने हस्ताक्षर किए। इस दौरान सेंथिल अवुडई कृष्णा राज एस., सवितोज सिंह गिल (AIG, NCR जोन) और IIT कानपुर के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. नवरोज उपस्थित रहे।
तकनीकी सहयोग से आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम
कौशलेन्द्र सिंह उप कमांडेंट, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, इकाई एसजेवीएनएल, झाकड़ी ने बताया कि CISF और IIT कानपुर के बीच हुए ये समझौते बल के तकनीकी एवं संस्थागत क्षमता विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। CISF पहले से ही IIT मद्रास, IIT रोपड़, IIITDM कांचीपुरम और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया जैसे संस्थानों के साथ सहयोग कर रहा है।
बहरोड़ में स्थापित होने वाला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ड्रोन सुरक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षण, अनुसंधान और तकनीकी विकास का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में काम करेगा। इन पहलों का उद्देश्य स्वदेशी तकनीकी समाधानों को बढ़ावा देना और देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को और मजबूत करना है।
