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सुप्रीम कोर्ट से हिमाचल के बागवानों को बड़ी राहत, सेब के पेड़ नहीं कटेंगे, हाईकोर्ट का आदेश रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के लाखों सेब बागवानों को बड़ी राहत देते हुए सेब के पेड़ काटने संबंधी हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया। फैसले से किसानों की आजीविका और राज्य की अर्थव्यवस्था को बड़ा संरक्षण मिला। पढ़ें पूरी खबर
ARB Times DeskBy ARB Times DeskDecember 17, 2025No Comments3 Mins Read
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एआरबी टाइम्स ब्यूरो | नई दिल्ली 

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को हिमाचल प्रदेश के लाखों बागवानों को बड़ी राहत देते हुए वन भूमि पर कथित अतिक्रमण बताकर सेब के पेड़ों को हटाने संबंधी हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस तरह के आदेश के दूरगामी सामाजिक और आर्थिक परिणाम होते हैं, जो समाज के हाशिए पर खड़े वर्गों और भूमिहीन लोगों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि फलदार पेड़ों को काटने से जुड़े फैसले नीतिगत दायरे में आते हैं और अदालतों को ऐसे मामलों में अत्यधिक सतर्कता बरतनी चाहिए। पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने आदेश पारित करते समय इसके व्यापक सामाजिक और आर्थिक प्रभावों पर पर्याप्त विचार नहीं किया।

शिमला जिले के कोटखाई में कोर्ट के आदेशों के बाद काटे गए सेब के पेड़। फाइल फोटो

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में सेब बागवानी किसानों की आजीविका का प्रमुख साधन होने के साथ-साथ राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। लाखों परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सेब उत्पादन पर निर्भर हैं, ऐसे में बिना किसी ठोस नीति और वैकल्पिक व्यवस्था के सेब के पेड़ों को काटने का आदेश समाज के कमजोर तबके को गहरे संकट में डाल सकता है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वन भूमि पर अतिक्रमण एक गंभीर कानूनी मुद्दा है और राज्य सरकार कानून के तहत कार्रवाई कर सकती है। अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि वह गरीब और भूमिहीन लोगों की सहायता के लिए केंद्र के समक्ष प्रस्ताव पेश करे।

शिमला जिले के कोटखाई में कोर्ट के आदेशों के बाद काटे गए सेब के पेड़। फाइल फोटो

यह मामला सुप्रीम कोर्ट में तब पहुंचा जब हिमाचल प्रदेश सरकार ने 2 जुलाई को दिए गए हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी। इसके अलावा पूर्व उप महापौर टिकेंद्र सिंह पंवर सहित अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं पर भी सुनवाई हुई। इससे पहले शीर्ष अदालत ने इन आदेशों पर अंतरिम रोक लगाई थी। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि मानसून के दौरान बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जाने से भूस्खलन और मिट्टी के कटाव जैसी आपदाओं का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने बताया कि 18 जुलाई तक चैथला, कुमारसैन और रोहड़ू क्षेत्रों में 3,800 से अधिक सेब के पेड़ काटे जा चुके थे, जबकि राज्यभर में करीब 50,000 पेड़ काटने की योजना थी। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान के साथ-साथ जन आक्रोश भी बढ़ा।

और पढ़ें
>> हाईकोर्ट के आदेश पर हिमाचल में वन विभाग की सख्ती ; सेब, नाशापाती और चेरी के 420 पेड़ काटे
>> सेब से लदे पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने सुप्रीम कोर्ट पहुंची हिमाचल सरकार, हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती

 

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