एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
Maha Shivratri 2026 : वैदिक पंचांग के अनुसार 15 फरवरी यानी आज महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जा रहा है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। मान्यता है कि इसी शुभ रात्रि में भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह हुआ था। इस दिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना, उपवास और रात्रि जागरण और चारों पहर शिवजी की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। विशेष रूप से अविवाहित युवक-युवतियां मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए महाशिवरात्रि व्रत रखते हैं। मान्यता है कि महाशिवरात्रि व्रत कथा का पाठ करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
चार प्रहर पूजा का शुभ समय
🔸 प्रथम प्रहर- शाम: 15 फरवरी — शाम 6:11 से रात 9:23 तक
🔸 द्वितीय प्रहर- रात: 15 फरवरी — रात 9:23 से 16 फरवरी अर्धरात्रि 12:35 तक
🔸 तृतीय प्रहर- मध्यरात्रि: 16 फरवरी — 12:35 से सुबह 3:47 तक
🔸 चतुर्थ प्रहर- प्रातः: 16 फरवरी — 3:47 से 6:59 तक
💧 जलाभिषेक के शुभ मुहूर्त
विशेष रूप से शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के लिए ये मुख्य शुभ समय बताए गए हैं:
सुबह 8:24–9:48
सुबह 9:48–11:11
सुबह 11:11–12:35 (अमृत सर्वोत्तम मुहूर्त)
शाम 6:11–7:47
इन सभी समयों में श्रद्धा से जल, दूध, घी, दही आदि अर्पित करना शुभ माना जाता है।
🌙 निशीथ काल
🔹 रात 12:09 से 1:01 तक का समय निशीथ काल कहलाता है — इसे विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा, जप और साधना के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। इस महाशिवरात्रि पर व्यतीपात योग, सर्वार्थसिद्धि योग सहित कई शुभ योग बन रहे हैं। इसके अलावा ग्रहों के संयोजन से विशेष फलदायी संयोग भी ग्रहयोगों में दिखाई दे रहे हैं।
🛕 पूजा-अर्चना की विधि
प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल आदि से अभिषेक करें।
बेलपत्र, धतूरा, फल-फूल, मिठाई अरपन करें।
‘ॐ नमः शिवाय’, महामृत्युंजय मंत्र तथा रुद्र गायत्री मंत्र का जाप करें।
रात्रि में जागरण करना शुभ माना जाता है।
पूजन के उपरांत आरती और भोग अर्पित करें।
महाशिवरात्रि पर करें इन मंत्रों का जाप
महामृत्युंजय मंत्र
ऊं त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्.
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
रुद्र गायत्री मंत्र
ऊं तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि.
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
महाशिवरात्रि की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार एक शिकारी था, जो कर्ज के बोझ से दबा हुआ था। कर्ज न चुका पाने पर उसे शिवरात्रि के दिन बंदी बना लिया गया। दिनभर उपवास की अवस्था में रहने के बाद वह जंगल में शिकार के लिए गया, लेकिन उसे कोई शिकार नहीं मिला। थककर वह एक बेलपत्र के पेड़ पर चढ़ गया। पेड़ के नीचे सूखे पत्तों से ढका एक शिवलिंग था, जिसे वह देख नहीं सका। जागते रहने के लिए उसने बेलपत्र तोड़कर नीचे गिराए। अनजाने में वे बेलपत्र शिवलिंग पर अर्पित हो गए और प्रथम प्रहर की पूजा पूर्ण हो गई। दूसरे प्रहर में एक गर्भवती हिरणी आई। उसने जीवनदान की प्रार्थना की और शिकारी ने उसे छोड़ दिया।
इस दौरान फिर बेलपत्र शिवलिंग पर गिरे और दूसरे प्रहर की पूजा हो गई। तीसरे प्रहर में दूसरी हिरणी आई और अपने पति से मिलने की अनुमति मांगी। शिकारी ने उसे भी जाने दिया। अंत में एक हिरण अपने परिवार सहित आया। उनके करुण भाव को देखकर शिकारी का हृदय परिवर्तन हो गया और उसने सभी को जीवनदान दे दिया। पूरी रात अनजाने में उपवास, बेलपत्र अर्पण और जागरण करने से उसका महाशिवरात्रि व्रत पूर्ण हुआ। भगवान शिव की कृपा से उसे मोक्ष प्राप्त हुआ और शिवलोक में स्थान मिला।
