एआरबी टाइम्स ब्यूरो | दिल्ली
श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना से ओतप्रोत वातावरण में संत निरंकारी मिशन द्वारा युगदृष्टा बाबा हरदेव सिंह की स्मृति में संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल समालखा में भावपूर्ण संत समागम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर परम् श्रद्धेय सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित के सान्निध्य में लाखों श्रद्धालुओं ने सतगुरु के पावन दर्शन और अमृतमयी प्रवचनों का श्रवण कर आत्मिक शांति, आनंद एवं दिव्य प्रेरणा का अनुभव प्राप्त किया।
अपने आशीर्वचनों में सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने कहा कि बाबा हरदेव सिंह जी का सम्पूर्ण जीवन मानवता, सेवा और प्रेम-भक्ति का दिव्य उदाहरण रहा। उन्होंने प्रेरित किया कि मानव जीवन का प्रत्येक क्षण सार्थक बने तथा हर पल इंसानियत, करुणा और मानवीय मूल्यों को समर्पित हो। बाबा जी ने सदैव यही संदेश दिया कि प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर मानवीय गुण विकसित कर निराकार का आसरा लेते हुए उद्देश्यपूर्ण जीवन जिए।
उन्होंने कहा कि यदि किसी के जीवन में दुख, पीड़ा या संघर्ष है, तो हमारा कर्तव्य उसे बढ़ाना नहीं बल्कि प्रेम, संवेदनशीलता और सहयोग से उसे कम करना है। जीवन ऐसा होना चाहिए जो रिश्तों में प्रेम और समर्पण की भावना को मजबूत करे। यही बाबा जी की शिक्षाओं का सार और सच्ची मानवता का स्वरूप है।
उन्होंने कहा कि ब्रह्मज्ञान प्राप्त होने के बाद जीवन केवल व्यक्तिगत सीमाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समस्त मानवता की सेवा, कल्याण और उत्थान का माध्यम बन जाता है। सच्ची सेवा दिखावे से परे प्रेम, विनम्रता और निस्वार्थ भावना से परिपूर्ण होती है, जबकि वास्तविक भक्ति व्यवहार, विचार और कर्मों में दिखाई देती है।
इस दौरान अमर संत अवनीत के समर्पित जीवन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सच्चा समर्पण वही है जिसमें सेवा का भाव केवल विचारों तक सीमित न होकर व्यवहार और प्राथमिकताओं में भी स्पष्ट दिखाई दे। उन्होंने गृहस्थ जीवन की जिम्मेदारियों के साथ संगत, सेवा और भक्ति को सर्वोपरि रखकर प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।
समागम के अंत में सतगुरु माता ने आशीर्वाद देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति सेवा, सुमिरण और सत्संग को अपनी प्राथमिकता बनाए तथा हर हृदय निराकार में समर्पित होकर प्रेम, शांति और मानवता का संदेश फैलाने का माध्यम बने।
आयोजन के दौरान गीतकारों, कवियों और विचारकों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से बाबा जी के प्रति श्रद्धा और भावनाओं को अभिव्यक्त किया। वक्ताओं ने बाबा हरदेव सिंह जी की दिव्य शिक्षाओं, सौम्य व्यक्तित्व, सेवा-समर्पण और मानव कल्याण के लिए किए गए कार्यों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। समागम में प्रस्तुत शब्दों और रचनाओं में बाबा जी के प्रेम और मानवता के संदेश की गहरी झलक देखने को मिली।
आज भी बाबा हरदेव सिंह की प्रेरणा श्रद्धालुओं के हृदय में जीवित है। वर्तमान में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज उनके संदेशों को आगे बढ़ाते हुए सेवा, समर्पण और सद्भाव का प्रकाश फैला रही हैं। उनके मार्गदर्शन में विश्वभर में मानवता, एकता और भाईचारे का संदेश निरंतर प्रसारित हो रहा है।
