एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव से जुड़े एक अहम मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। मामला सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण और पंचायत चुनाव में उम्मीदवार की पात्रता से जुड़ा हुआ है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान फिलहाल याचिकाकर्ता को तत्काल राहत नहीं दी गई। हालांकि कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि रिट याचिका लंबित रहने के बावजूद याचिकाकर्ता कानून के अनुसार चुनाव याचिका दायर कर सकती है।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता ने रिटर्निंग अधिकारी के 12 मई 2026 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनका नामांकन पत्र रद्द कर दिया गया था। चुनाव अधिकारी ने हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज अधिनियम, 1994 की धारा 122(1)(ई) और हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (संशोधन अध्यादेश) 2026 का हवाला देते हुए कहा था कि उम्मीदवार के ससुर ने सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया है। इसी आधार पर काजल को पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया।
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याचिकाकर्ता ने कोर्ट में क्या दलील दी?
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में कहा गया कि कानून की गलत व्याख्या की गई है। दलील में कहा गया कि यदि बहू सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करती है, तो उसके ससुर को चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराया जा सकता है। लेकिन यदि अतिक्रमण ससुर द्वारा किया गया हो, तो उसके आधार पर बहू को चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा सकता। याचिका में यह भी कहा गया कि चुनाव अधिकारी ने कानून की मंशा के विपरीत जाकर कार्रवाई की है, जिससे उम्मीदवार के अधिकार प्रभावित हुए हैं।
चार सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की है। तब तक राज्य सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि क्या परिवार के किसी सदस्य के कथित अतिक्रमण का असर सीधे उम्मीदवार की पात्रता पर डाला जा सकता है। यह मामला अब हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों और अयोग्यता से जुड़े प्रावधानों की कानूनी व्याख्या के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में इस फैसले का असर पंचायत चुनावों के अन्य मामलों पर भी पड़ सकता है।
