एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
हिमाचल प्रदेश में करुणामूलक आधार पर नौकरी पाने के नियमों को लेकर लंबे समय से चली आ रही असमंजस की स्थिति को राज्य सरकार ने पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। नए निर्देशों के अनुसार, यदि अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन करने वाला मूल पात्र आश्रित निर्धारित अधिकतम आयु सीमा को पार कर लेता है, तो उसका दावा स्थायी रूप से समाप्त माना जाएगा। महत्वपूर्ण यह है कि उस मूल आवेदक के स्थान पर परिवार का कोई भी अन्य सदस्य (जैसे पुत्र, पुत्री या अन्य आश्रित) नौकरी के लिए नया दावा पेश नहीं कर सकेगा।
उच्च शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में प्रदेश के सभी जिला और उपमंडल स्तर के उपनिदेशकों को विस्तृत और कड़े निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि इन नियमों का कड़ाई से पालन किया जाए ताकि भविष्य में किसी भी तरह की प्रशासनिक जटिलताओं से बचा जा सके।
यह निहित या हस्तांतरणीय अधिकार नहीं: सरकार
निदेशालय की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि अनुकंपा नियुक्ति सामान्य भर्ती प्रक्रिया का एक अपवाद है। इसका मुख्य और एकमात्र उद्देश्य सरकारी कर्मचारी के आकस्मिक निधन के बाद उसके परिवार को तत्काल आर्थिक संकट से उबारना और राहत प्रदान करना है। सरकार ने साफ किया है कि यह रोजगार पाने का कोई स्थाई, निहित या हस्तांतरणीय अधिकार नहीं है।
“मूल आवेदक के स्थान पर परिवार के किसी अन्य सदस्य को अवसर देना वस्तुतः एक नया दावा माना जाएगा, जिसका वर्तमान अनुकंपा नियुक्ति नीति में कोई प्रावधान नहीं है।” – उच्च शिक्षा निदेशालय
गलत मिसालों पर लगेगी रोक
अधिकारियों को सचेत करते हुए निदेशालय ने कहा है कि नियमों से बाहर जाकर ऐसे प्रतिस्थापन (रिप्लेसमेंट) वाले मामलों को स्वीकार करने से भविष्य में गलत मिसालें कायम होंगी और अनावश्यक प्रशासनिक विवाद खड़े होंगे। यदि मूल आवेदक की उम्र सीमा निकल जाती है, तो फाइल स्वतः बंद हो जाएगी। सरकार के इस कदम से अब विभागों में अनुकंपा नियुक्तियों को लेकर पारदर्शिता आएगी और लटके हुए मामलों का नीति के अनुरूप त्वरित निपटारा हो सकेगा।
