एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शनिवार को चमियाना (शिमला) स्थित सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में लगभग 23 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित अत्याधुनिक 3-टेस्ला एमआरआई (3-Tesla MRI) मशीन का शुभारंभ किया। आईजीएमसी शिमला के बाद यह प्रदेश की दूसरी ऐसी उन्नत मशीन है, जिससे मरीजों को बेहद कम समय में सटीक और उच्च गुणवत्ता वाली इमेजिंग रिपोर्ट मिल सकेगी। सीएम ने कहा कि अब जटिल बीमारियों के निदान के लिए मरीजों को निजी केंद्रों में जाकर मोटी रकम खर्च नहीं करनी पड़ेगी।
19 साल पुरानी मशीनें बदलीं, स्वास्थ्य-शिक्षा पर फोकस
मुख्यमंत्री ने पूर्व भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लंबे समय तक स्वास्थ्य क्षेत्र की उपेक्षा की गई, जिसके चलते सालों पुराने उपकरणों से काम चलाया जा रहा था। वर्तमान सरकार ने आईजीएमसी से 19 साल पुरानी एमआरआई मशीन को हटाकर आधुनिक प्रणाली स्थापित की है और आने वाले समय में टांडा, नेरचौक सहित प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी ये मशीनें लगाई जाएंगी। डॉक्टरों को रोकने के लिए प्रतिस्पर्धी वेतनमान दिया जा रहा है और स्वास्थ्य-शिक्षा के लिए बजट की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।
रोबोटिक सर्जरी के बाद अब ‘शून्य प्रतीक्षा अवधि’ का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में 125 करोड़ रुपये की लागत से पूरी तरह स्वचालित प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी, ताकि जांच रिपोर्ट में किसी त्रुटि की गुंजाइश न रहे। टांडा, आईजीएमसी और नेरचौक मेडिकल कॉलेज में शुरू की गई रोबोटिक सर्जरी, पैट (PET) स्कैन और एमआरआई की सुविधाएं निजी अस्पतालों के मुकाबले न्यूनतम दरों पर मिल रही हैं। सरकार का लक्ष्य है कि जांच के लिए मरीजों को कम से कम इंतजार करना पड़े ।

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