एआरबी टाइम्स ब्यूरो | रामपुर बुशहर
शिमला जिले के रामपुर उपमंडल के गरटोला (ननखड़ी ) में हुए एचआरटीसी बस हादसे ने न सिर्फ तीन परिवारों को उम्र भर का दर्द दिया है, बल्कि सूबे की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकार की संवेदनहीनता को भी पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। 24 यात्रियों से भरी बस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद जब लहूलुहान घायलों को क्षेत्र के सबसे बड़े सरकारी खनेरी अस्पताल लाया गया, तो वहां का नजारा इलाज के बजाय सरकारी नाकामी का जीता-जागता सबूत पेश कर रहा था।
महीनों से बंद हैं एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड, प्राइवेट क्लीनिकों की चांदी
हैरानी और घोर लापरवाही की बात यह है कि खनेरी अस्पताल में एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जैसी बेहद बुनियादी और आपातकालीन जांच सेवाएं महीनों से धूल फांक रही हैं। हादसे के बाद तड़पते घायलों को अंदरूनी चोटों का पता लगाने के लिए निजी क्लीनिकों के चक्कर काटने पड़े। हालांकि, प्रशासन ने निजी क्लीनिकों को मुफ्त जांच के निर्देश दिए थे, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या सरकार जनता को केवल निजी सेंटरों के रहमोकरम पर छोड़ना चाहती है? आपदा के समय सरकारी रीढ़ का इस तरह टूट जाना स्वास्थ्य विभाग की आपराधिक लापरवाही को दर्शाता है।
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न पानी, न पंखे, उमस से तड़पे मरीज
खनेरी अस्पताल प्रशासन की संवेदनहीनता यहीं खत्म नहीं हुई। तीमारदारों और प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोप लगाया कि अस्पताल के वार्डों में पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं थी। भीषण गर्मी और उमस के बीच अस्पताल के पंखे बंद पड़े थे, जिससे घायल मरीज और उनके परिजन तड़पने को मजबूर हो गए। एक तरफ मरीज अपनों को खोने के गम में थे, वहीं दूसरी तरफ अस्पताल के भीतर का यह नारकीय माहौल सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता का परिचय दे रहा था।
सामाजिक संस्था ने संभाला मोर्चा
रक्तदान सेवा परिवार सोसायटी’ ने मानवीय मिसाल पेश करते हुए सरकारी नाकामी पर तमाचा जड़ा। संस्था के सदस्यों ने खुद आगे आकर प्यास से तड़पते मरीजों के लिए पानी का इंतजाम किया और देर रात तक घायलों व उनके परिजनों के लिए लंगर चलाया। स्थानीय लोगों ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि जिस अस्पताल को करोड़ों का बजट मिलता है, वहां की व्यवस्थाएं एक स्वयंसेवी संस्था के भरोसे चल रही हैं।
जनता का फूटा गुस्सा: किसी बड़ी आपदा में लाशें गिनेगी सरकार
स्थानीय नागरिकों और मरीजों के परिजनों में सरकार के खिलाफ भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि खनेरी अस्पताल पूरे रामपुर क्षेत्र की लाइफलाइन है, लेकिन इसे रामभरोसे छोड़ दिया गया है। यदि समय रहते इन बंद पड़ी जांच सेवाओं को बहाल नहीं किया गया और बिजली-पानी जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं को दुरुस्त नहीं किया गया, तो भविष्य में किसी बड़े हादसे के समय यह अस्पताल सिर्फ रेफरल सेंटर बनकर रह जाएगा और जनता को अपनी जान गंवानी पड़ेगी।
