एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला | हिमाचल प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थियों की शैक्षणिक क्षमता को सुधारने के लिए समग्र शिक्षा अभियान ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य के सरकारी स्कूलों में कक्षा 6वीं से 10वीं तक के विद्यार्थियों के लिए ‘लर्निंग एन्हांसमेंट प्रोग्राम 2.0’ (LEP 2.0) के तहत अब प्रतिदिन 45 मिनट का विशेष ‘जीरो पीरियड’ संचालित किया जाएगा। समग्र शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक ने इस संबंध में प्रदेश के सभी उपनिदेशकों और जिला परियोजना अधिकारियों (DPO) को सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं।
लर्निंग एन्हांसमेंट प्रोग्राम 2.0: मुख्य बिंदु
अवधि: यह विशेष सुधारात्मक कार्यक्रम लगभग 12 सप्ताह तक चलेगा।
मुख्य विषय: पूर्व कक्षाओं के गणित, अंग्रेजी और हिंदी विषयों की मूलभूत अवधारणाओं (Basics) को दोहराया जाएगा।
सप्ताहिक विभाजन: गणित के लिए सप्ताह में 3 पीरियड, अंग्रेजी के लिए 2 और हिंदी के लिए 1 जीरो पीरियड निर्धारित।
विज्ञान विषय: विज्ञान के लिए अलग से जीरो पीरियड नहीं होगा, इसे नियमित कक्षाओं में ही पढ़ाया जाएगा।
डिजिटल ट्रैकिंग: 12 अगस्त से विद्यार्थियों की वर्कबुक के पीछे दिए QR कोड को ‘आपकी पुस्तिका बॉट‘ से स्कैन कर पंजीकरण अनिवार्य होगा।
स्कूलों के अनुसार ‘जीरो पीरियड’ का टाइम टेबल
समग्र शिक्षा अभियान के आदेशानुसार जीरो पीरियड का समय मौसम और क्षेत्र के आधार पर तय किया गया है:
| स्कूल का प्रकार | समय (Timing) | शुरुआत की तिथि |
| शीतकालीन (Winter Closing) व अति-ग्रीष्मकालीन स्कूल | सुबह 10:00 से 10:45 बजे तक | तत्काल प्रभाव से (बुधवार से) |
| अन्य ग्रीष्मकालीन (Summer Closing) स्कूल | सुबह 9:00 से 9:45 बजे तक | 17 अगस्त से लागू |
(नोट: लाहौल-स्पीति, किन्नौर, शिमला, चंबा, मंडी, सोलन और सिरमौर के शीतकालीन तथा ऊना, सोलन व सिरमौर के अति-ग्रीष्मकालीन स्कूलों में यह व्यवस्था तुरंत लागू कर दी गई है।)
जीरो पीरियड के दौरान नहीं होगी कोई अन्य गतिविधि
समग्र शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि Zero Period का संचालन प्रतिदिन निर्धारित समय पर ही करना अनिवार्य होगा:
कोई अन्य कक्षा या परीक्षा नहीं: 45 मिनट के इस जीरो पीरियड के दौरान कोई अन्य कक्षा, परीक्षा, प्रार्थना या खेल गतिविधि आयोजित नहीं की जाएगी।
अनिवार्य उपस्थिति: विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों की उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य होगा।
निगरानी की जिम्मेदारी: स्कूल के प्रधानाचार्य (Principal) और मुख्याध्यापक (Headmaster) इस पूरे कार्यक्रम के प्रभारी रहेंगे तथा बच्चों के लर्निंग लेवल में सुधार की प्रगति की लगातार निगरानी करेंगे।
