एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) परिसर में स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने विश्वविद्यालय प्रशासन की नीतियों और छात्र विरोधी फैसलों के खिलाफ बुधवार को विशाल विरोध प्रदर्शन किया। एसएफआई ने फीस वृद्धि वापस लेने, 186 प्रोफेसर भर्तियों की न्यायिक जांच कराने और छात्र केंद्रीय संघ (एससीए) के चुनाव बहाल करने की मांग उठाई।
इससे पहले 12 अगस्त को भी एसएफआई ने विश्वविद्यालय परिसर में सांकेतिक प्रदर्शन कर प्रशासन को फीस वृद्धि वापस लेने और कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई की चेतावनी दी थी। संगठन का आरोप है कि इसके बावजूद प्रशासन ने छात्रों की मांगों पर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए अंकिता, मुकेश और विक्की भारती ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर शिक्षा के व्यापारीकरण और भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बढ़ी हुई फीस से गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों पर आर्थिक बोझ बढ़ा है।
एसएफआई ने विश्वविद्यालय में 186 प्रोफेसर नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराने की मांग की। संगठन ने कहा कि जांच के माध्यम से पूरे मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। कैंपस सचिव मुकेश ने लंबे समय से बंद एससीए चुनाव तत्काल बहाल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि छात्र संघ चुनाव विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक अधिकार हैं। एसएफआई ने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को प्रदेश स्तर तक तेज किया जाएगा।
