एआरबी टाइम्स ब्यूरो, रामपुर बुशहर
रामपुर के महात्मा गांधी सेवा चिकित्सा परिसर (एमजीएमएससी) खनेरी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए सात नए चिकित्सकों की तैनाती की गई है। इनमें रेडियोलॉजिस्ट, दो नेत्र रोग विशेषज्ञ सहित विभिन्न विशेषज्ञताओं के चिकित्सक शामिल हैं। लंबे समय से विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी का सामना कर रहे अस्पताल में नई तैनाती से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की उम्मीद जगी है। अब अस्पताल में कुल चिकित्सकों की संख्या 32 हो गई है।
अस्पताल में डॉ. सोनिया नेगी को चिकित्सा अधिकारी (निश्चेतना), डॉ. अनीता भारती को चिकित्सा अधिकारी (स्त्री एवं प्रसूति रोग), डॉ. शाम्भवी जोबटा को चिकित्सा अधिकारी (नेत्र रोग), डॉ. योग राज को चिकित्सा अधिकारी (आंतरिक चिकित्सा), डॉ. अंकुश चौहान को चिकित्सा अधिकारी (नेत्र रोग), डॉ. अमिता ठाकुर को चिकित्सा अधिकारी (मनोचिकित्सा) और डॉ. विशाल नेगी को चिकित्सा अधिकारी (रेडियोलॉजिस्ट) के रूप में तैनाती दी गई है। नए चिकित्सकों की तैनाती से अस्पताल में विशेषज्ञ सेवाओं को विस्तार मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति से रेडियोलॉजी संबंधी जांच और सेवाओं को मजबूती मिलेगी, जबकि दो नेत्र रोग विशेषज्ञों की उपलब्धता से आंखों से संबंधित उपचार के लिए मरीजों को सुविधा मिल सकेगी।
राजपूत कल्याण बोर्ड के सदस्य अनिरुद्ध सिंह बिष्ट ने चिकित्सकों की तैनाती के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल तथा स्थानीय विधायक एवं सातवें वित्त आयोग के अध्यक्ष नंद लाल का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि खनेरी अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती क्षेत्र की जनता के लिए राहत की बात है। इससे मरीजों को बेहतर उपचार सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
खनेरी अस्पताल रामपुर के अलावा किन्नौर, आनी, कुमारसैन, करसोग और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या बढ़ने से अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
स्थानीय लोगों ने भी चिकित्सकों की तैनाती का स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता से मरीजों को उपचार के लिए अन्य स्थानों का रुख कम करना पड़ेगा। हालांकि अब लोगों की निगाह इस बात पर है कि सभी तैनात चिकित्सक नियमित रूप से सेवाएं शुरू करें, ताकि सरकारी स्तर पर की गई इस पहल का लाभ मरीजों को धरातल पर मिल सके।
