एआरबी टाइम्स ब्यूरो, किन्नौर
वन अधिकार अधिनियम-2006 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सोमवार को बचत भवन रिकांग पीओ में राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जन शिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में कार्यशाला आयोजित की गई। इस दौरान अधिनियम के प्रावधानों, पात्र व्यक्तियों एवं समुदायों के वन अधिकारों की मान्यता तथा लंबित दावों के निपटारे की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्री ने निर्देश दिए कि जिला एवं उपमंडल स्तरीय वन अधिकार समितियों की बैठकें हर सप्ताह आयोजित की जाएंगी। जिला स्तरीय वन अधिकार समिति की अगली बैठक 15 अक्तूबर को होगी।
कार्यशाला के दौरान राजस्व मंत्री ने किन्नौर जिले के पूह, कल्पा और निचार विकास खंडों के एक-एक गांव में उपमंडल स्तरीय वन अधिकार समितियों के पास लंबित मामलों की जानकारी ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से दावों की जांच, उनकी वर्तमान स्थिति और निपटारे के लिए की जा रही कार्रवाई का ब्यौरा प्राप्त किया। उन्होंने अधिकारियों को लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करने और पात्र व्यक्तियों एवं समुदायों के दावों पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जगत सिंह नेगी ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम-2006 का उद्देश्य अनुसूचित जनजातियों और अन्य परंपरागत वन निवासियों के पात्र वन अधिकारों को मान्यता प्रदान करना है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अधिनियम के प्रावधानों की पूरी जानकारी होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि दावों की जांच निर्धारित पात्रता शर्तों, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित अभिलेखों के आधार पर की जानी चाहिए। पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि जानकारी के अभाव या प्रक्रियागत कठिनाइयों के कारण किसी पात्र व्यक्ति अथवा समुदाय का दावा प्रभावित न हो।
उन्होंने ग्राम सभाओं और वन अधिकार समितियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि दावों के संकलन, तथ्यों के सत्यापन और आवश्यक कार्रवाई में इन संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। समितियों के सदस्यों को अधिनियम के प्रावधानों, अपनी जिम्मेदारियों और दावों से संबंधित प्रक्रियाओं की उचित जानकारी दी जानी चाहिए।
कार्यशाला में व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वन अधिकारों की मान्यता, पात्रता की शर्तों, दावों के सत्यापन, आवश्यक दस्तावेजों तथा ग्राम सभाओं और वन अधिकार समितियों की जिम्मेदारियों पर भी चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त राजस्व, वन एवं जनजातीय विकास विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और ग्रामीण स्तर पर जागरूकता बढ़ाने पर बल दिया गया, ताकि पात्र लोग अपने अधिकारों और दावा प्रस्तुत करने की प्रक्रिया से परिचित हो सकें।
उपायुक्त किन्नौर एवं जिला स्तरीय वन अधिकार समिति की अध्यक्ष सोनाक्षी सिंह तोमर ने राजस्व मंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्यशालाओं से अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अधिनियम के प्रावधानों और प्रक्रियाओं को समझने में मदद मिलती है। उन्होंने आश्वस्त किया कि जिला प्रशासन अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन और लंबित मामलों की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करेगा।
कार्यशाला में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी पूह रविंदर ठाकुर, उप अरण्यपाल अरविंद, परियोजना अधिकारी एकीकृत जनजातीय विकास किन्नौर घनश्याम दास, उपमंडलाधिकारी कल्पा प्रवीण भारद्वाज, उपमंडलाधिकारी निचार नेहा नेगी, खंड विकास अधिकारी कल्पा हिमांशी शर्मा, खंड विकास अधिकारी निचार डॉ. जितेंद्र चंदेल और खंड विकास अधिकारी पूह इंदर चंद सहित जिला एवं उपमंडल स्तरीय वन अधिकार समितियों के सदस्य उपस्थित रहे।
