एआरबी टाइम्स ब्यूरो, धर्मशाला
देश के सैन्य इतिहास में विशिष्ट योगदान देने वाले हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले से ताल्लुक रखने वाले भारतीय सेना के 14वें थल सेनाध्यक्ष (COAS) जनरल विश्वनाथ शर्मा (वीएन शर्मा) का निधन हो गया है। उनके निधन से सैन्य जगत और पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है। जनरल वीएन शर्मा देश के पहले मरणोपरांत परमवीर चक्र प्राप्तकर्ता मेजर सोमनाथ शर्मा के छोटे भाई थे। उनके एक अन्य बड़े भाई लेफ्टिनेंट जनरल सुरिंदर नाथ शर्मा भी भारतीय सेना के पूर्व मुख्य अभियंता (इंजीनियर-इन-चीफ) के रूप में सेवा दे चुके हैं।
मई 1988 से जून 1990 तक रहे सेनाध्यक्ष
जनरल वीएन शर्मा को जून 1950 में 16 कैवलरी (आर्मर्ड कोर) में कमीशन मिला था। उन्होंने मई 1988 से जून 1990 तक भारतीय सेना के 14वें थल सेनाध्यक्ष के रूप में देश का नेतृत्व किया। उनका कार्यकाल काफी चुनौतीपूर्ण रहा, जिसके दौरान श्रीलंका में भारतीय शांति सेना (IPKF) का ऑपरेशन संचालित हो रहा था और पूर्वोत्तर (North-East) भारत में सुरक्षा स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई थी। उन्होंने अपनी उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता से इन परिस्थितियों को संभाला।
1971 के भारत-पाक युद्ध में निभाई थी अहम भूमिका साल 1971 के ऐतिहासिक भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान जनरल शर्मा ने एक आर्मर्ड डिवीजन के ‘कर्नल जनरल स्टाफ (ऑपरेशन्स)’ के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं। इसके बाद अपने लंबे और शानदार सैन्य करियर में उन्होंने उग्रवाद प्रभावित इलाकों में माउंटेन ब्रिगेड, राजस्थान में आर्मर्ड ब्रिगेड और पूर्वी सेक्टर में माउंटेन डिवीजन की कमान संभाली। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) और परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM) से सम्मानित किया गया था। पूर्वी सेना कमांडर (Eastern Army Commander) के तौर पर जनरल शर्मा का कार्यकाल बेहद चुनौतीपूर्ण था। उसी दौरान अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के बीच तनावपूर्ण सुमदोरोंग चू गतिरोध (Sumdorong Chu Standoff) हुआ था। उनकी सूझबूझ और रणनीतिक कूटनीति के चलते भारतीय सेना ने सीमा पर अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी थी।
चुनौतीपूर्ण दौर में संभाली थी देश की कमान
मई 1988 से जून 1990 तक जब जनरल वीएन शर्मा थल सेनाध्यक्ष (COAS) रहे, तब भारतीय सेना एक साथ कई मोर्चों पर चुनौतियों से जूझ रही थी। श्रीलंका में भारतीय शांति सेना (IPKF) लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) के खिलाफ ऑपरेशन चला रही थी। पंजाब और पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद चरम पर था। जम्मू-कश्मीर में उग्रवाद की शुरुआत हो चुकी थी, वहीं दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर पर लगातार गोलाबारी जारी थी।
शर्मा परिवार: देशभक्ति और सैन्य सेवा की मिसाल
हिमाचल के इस प्रतिष्ठित शर्मा परिवार का भारतीय सशस्त्र बलों में ऐतिहासिक योगदान रहा है:
मेजर सोमनाथ शर्मा (भाई): 1947 के बड़गाम युद्ध में अदम्य साहस दिखाते हुए देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया और स्वतंत्र भारत के पहले परमवीर चक्र से सम्मानित हुए।
मेजर जनरल अमरनाथ शर्मा (पिता): सेना के ‘मेडिकल सर्विसेज’ के डायरेक्टर रहे। उन्होंने देश सेवा को प्राथमिकता देते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के डायरेक्टर जनरल बनने का प्रस्ताव तक ठुकरा दिया था।
