शिमला (एआरबी टाइम्स ब्यूरो) | हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भूतपूर्व सैनिक कोटे के तहत अनुबंध आधार पर नियुक्त ड्राइंग मास्टरों के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं की प्रारंभिक नियुक्ति की तिथि से पूरी अनुबंध सेवा अवधि को वरिष्ठता , वार्षिक वेतन वृद्धि , पेंशन और अन्य सभी वित्तीय लाभों के लिए गिना जाए। अदालत ने ईश्वर दत्त शर्मा व अन्य की ओर से दायर याचिका का निपटारा करते हुए यह निर्णय सुनाया।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2008-09 में ड्राइंग मास्टरों के पदों के लिए शुरू की गई भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। शिक्षा विभाग ने सिरमौर जिले में भूतपूर्व सैनिक कोटे के तहत पदों को भरने के लिए प्रक्रिया शुरू की थी। सैनिक कल्याण बोर्ड की ओर से नामों की सिफारिश के बाद 30 अगस्त 2011 को अभ्यर्थियों को नियमित पदों के स्थान पर केवल अनुबंध के आधार पर नियुक्ति पत्र जारी किए गए। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि भूतपूर्व सैनिक कोटे के बैकलॉग पदों को नियमतः नियमित आधार पर ही भरा जाना चाहिए था। अनुबंध पर नियुक्ति देना गैरकानूनी और संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 का स्पष्ट उल्लंघन है।
सरकार की दलील और हाईकोर्ट का फैसला
राज्य सरकार का पक्ष : सरकार ने तर्क दिया कि पदों को नियमित, तदर्थ या अनुबंध पर भरना नियोक्ता का नीतिगत मामला और विशेषाधिकार है। चयन प्रक्रिया सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति से नए भर्ती एवं पदोन्नति नियमों (R&P Rules) के तहत की गई थी, इसलिए नियमित नियुक्ति का दावा विचारणीय नहीं है।
अदालत का निर्णय: हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं का चयन सैनिक कल्याण बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर पूरी तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए हुआ था। न्यायालय ने जगदीश चंद और ताज मोहम्मद बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामलों में दिए गए डिवीजन बेंच के फैसलों का संदर्भ देते हुए कहा कि अनुबंध सेवा को वरिष्ठता और पेंशन लाभों के लिए गिने जाने का सिद्धांत सुप्रीम कोर्ट तक अंतिम रूप से स्थापित हो चुका है। ऐसे में याचिकाकर्ताओं को उनकी प्रथम नियुक्ति तिथि से ही समस्त परिणामी सेवा लाभ मिलने चाहिए।
