एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला | Himachal High Court ने भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी-लेह रेलवे लाइन के निर्माण के लिए करीब 538 बीघा निजी भूमि के अधिग्रहण को लेकर जारी प्रारंभिक अधिसूचना रद्द कर दी है। अदालत ने माना कि राज्य सरकार निर्धारित समय सीमा के भीतर भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकी। इसके बाद समय सीमा बढ़ाने के लिए जारी की गई अधिसूचनाओं में भी ठोस कारणों का उल्लेख नहीं किया गया।
न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश योगेश जसवाल की खंडपीठ ने कुलदीप ठाकुर व अन्य ग्रामीणों की ओर से दायर याचिका स्वीकार करते हुए 29 मार्च 2023 को जारी प्रारंभिक अधिसूचना को भूमि अधिग्रहण कानून की धारा 19(7) के तहत रद्द कर दिया। अदालत ने समय बढ़ाने के लिए 16 मार्च 2024, 24 मार्च 2025 और 25 मार्च 2026 को जारी तीनों अधिसूचनाओं को भी गैरकानूनी और बदनीयती से जारी माना।
12 महीने में पूरी होनी थी प्रक्रिया
मामला बिलासपुर जिले की सदर तहसील के अपरली भटेड़, बरमाणा और खतेड़ क्षेत्रों की निजी भूमि से संबंधित है। राज्य सरकार ने रेलवे लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रारंभिक अधिसूचना 29 मार्च 2023 को जारी की थी। भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 के प्रावधानों के अनुसार प्रारंभिक अधिसूचना जारी होने के 12 महीने के भीतर भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास से संबंधित अंतिम घोषणा की जानी थी।हालांकि, निर्धारित अवधि में प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। इसके बजाय सरकार ने समय बढ़ाने के लिए तीन अलग-अलग अधिसूचनाएं जारी कीं। पहली अधिसूचना 16 मार्च 2024, दूसरी 24 मार्च 2025 और तीसरी 25 मार्च 2026 को जारी हुई। इन आदेशों में देरी का कारण प्रशासनिक परिस्थितियों के चलते पुनर्वास योजना को अंतिम रूप नहीं दिया जाना बताया गया था।
प्रशासनिक कारण बताना पर्याप्त नहीं : हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने कहा कि केवल प्रशासनिक कारणों का उल्लेख करके कानून में निर्धारित समय सीमा को बढ़ाया नहीं जा सकता। सरकार को यह स्पष्ट करना आवश्यक था कि पुनर्वास योजना तैयार करने में वास्तविक बाधाएं क्या थीं और किन ठोस परिस्थितियों के कारण तय अवधि में प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। सरकारी रिकॉर्ड की समीक्षा के दौरान पीठ को ऐसे स्पष्ट और ठोस कारण नहीं मिले। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि प्रारंभिक अधिसूचना जारी होने के करीब साढ़े तीन साल बाद भी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी। ऐसे में समय सीमा बढ़ाने के लिए जारी की गई अधिसूचनाओं को अदालत ने कानून के अनुरूप नहीं माना।
