एआरबी टाइम्स ब्यूरो, रामपुर बुशहर
विशेष न्यायाधीश (सत्र न्यायाधीश) कुल्लू प्रकाश चंद राणा की अदालत ने नाबालिग से दुराचार, मानव तस्करी और जबरन वेश्यावृत्ति के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने पीड़िता की सगी मां समेत तीनों दोषियों को विभिन्न अपराधों में 10-10 वर्ष तक के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है।
दोषियों की पहचान शिव शंकर उर्फ सिकंदर पुत्र सीता राम, निवासी लालगंज, जिला बरेली, उत्तर प्रदेश, वर्तमान निवासी जीरकपुर, मोहाली; नितिन जैन उर्फ मन्नू पुत्र विजय कुमार जैन, निवासी करनाल, हरियाणा तथा पीड़ित नाबालिग की मां के रूप में हुई है। तीनों को भारतीय दंड संहिता, पॉक्सो अधिनियम और अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया गया है।
मुख्य दोषी शिव शंकर उर्फ सिकंदर को अदालत ने आईपीसी की धारा 376(2), 370(4), 120बी तथा अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम की धारा 4 और 6 के तहत 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त धारा 370-ए(1) के तहत पांच वर्ष के कठोर कारावास व पांच हजार रुपये जुर्माना और धारा 506 के तहत तीन वर्ष के कठोर कारावास व तीन हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।
नितिन जैन उर्फ मन्नू को आईपीसी की धारा 370(4), 120बी तथा अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम की धारा 4 और 6 के तहत 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा दी गई। इसके अलावा पॉक्सो अधिनियम की धारा 17 के तहत सात वर्ष का कठोर कारावास व 10 हजार रुपये जुर्माना, आईपीसी की धारा 370-ए(1) के तहत पांच वर्ष का कठोर कारावास व पांच हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 506 के तहत तीन वर्ष का कठोर कारावास व तीन हजार रुपये जुर्माना लगाया गया।
अपनी ही बेटी को इस दलदल में धकेलने के अपराध में अदालत ने पीड़िता की मां को भी आईपीसी की धारा 370(4), 120बी तथा अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम की धारा 4 और 6 के तहत 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। इसके साथ ही पॉक्सो अधिनियम की धारा 17 के तहत सात वर्ष का कठोर कारावास व 10 हजार रुपये जुर्माना तथा आईपीसी की धारा 370-ए(1) के तहत पांच वर्ष का कठोर कारावास व पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई। अदालत के आदेश के अनुसार जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में दोषियों को तीन महीने से एक वर्ष तक का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। सभी मुख्य सजाएं एक साथ चलेंगी।
जिला न्यायवादी कुलभूषण गौतम ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि यह मामला 29 अप्रैल 2018 को सामने आया था। उस समय चाइल्ड हेल्पलाइन मनाली की टीम पीड़ित नाबालिग को लेकर पुलिस थाना मनाली पहुंची और शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पीड़िता और अन्य युवतियों को जान से मारने की धमकी देकर जबरन वेश्यावृत्ति में धकेला गया। उनसे क्लबों में डांस करवाया जाता था और विभिन्न होटलों में ग्राहकों के पास भेजकर रकम वसूली जाती थी। पीड़िता ने बताया था कि उसकी सगी मां ने ही उसे इस धंधे में धकेला था। इसके एवज में आरोपी सिकंदर ने उसकी मां को 40 हजार रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया था। शिव शंकर उर्फ सिकंदर और नितिन जैन उर्फ मन्नू मिलकर इस अनैतिक धंधे को संचालित करते थे।
शिकायत के आधार पर पुलिस थाना मनाली में प्राथमिकी संख्या 96/2018 दर्ज की गई थी। पुलिस ने जांच पूरी कर अदालत में चालान पेश किया। अभियोजन पक्ष ने आरोप साबित करने के लिए अदालत में 14 गवाह पेश किए। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
